उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद हेली रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, अब तक कितने लोग बचाए गए?

Uttarakhand उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्रों में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के बाद हालात गंभीर बने हुए हैं। आपदा के तीसरे दिन गुरुवार को भी राहत और बचाव कार्य पूरी ताकत के साथ जारी हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और राज्य प्रशासन की टीमें मौके पर युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उत्तरकाशी पहुंचे और राहत कार्यों की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री धामी ने आज गुरुवार सुबह एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर धराली क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने हेली रेस्क्यू ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि “प्रातःकाल से ही हेली रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। यात्रा मार्ग बाधित होने के कारण जो यात्री फंसे थे, उन्हें मातली हेलीपैड, उत्तरकाशी सुरक्षित लाया जा रहा है।”

राज्य आपदा परिचालन केंद्र के अनुसार गुरुवार को अब तक 43 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। इनमें से अधिकतर लोग तीर्थयात्री हैं जो गंगोत्री धाम यात्रा के दौरान इस आपदा में फंस गए थे। महाराष्ट्र के जलगांव जिले की निवासी अनामिका मेहरा ने सपरिवार सुरक्षित बचाए जाने के बाद सरकार और रेस्क्यू टीम का आभार व्यक्त किया।

इस बीच, मातली से हर्षिल के बीच हेलीकॉप्टर शटल सेवा शुरू कर दी गई है। उकाडा (UKADA) के कुल 08 हेलीकॉप्टर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। साथ ही, राजपूताना राइफल्स के 150 जवान, आईटीबीपी के 100 से अधिक कर्मी और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें भी धरातल पर राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावितों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दे रही हैं, वहीं देहरादून, कोरोनेशन अस्पताल और एम्स ऋषिकेश में आईसीयू और जनरल बेड आरक्षित कर दिए गए हैं।

एसडीआरएफ के पुलिस महानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी ने जानकारी दी कि सभी रेस्क्यू एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि किसी भी प्रभावित व्यक्ति तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर पीड़ित व्यक्ति तक राहत पहुंचाना और जनजीवन को सामान्य करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इस आपदा के प्रभाव केवल उत्तरकाशी तक सीमित नहीं हैं। राज्य के अन्य जिलों जैसे पौड़ी गढ़वाल, चमोली, हरिद्वार और रुद्रप्रयाग में भी भारी बारिश से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानों तक हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में सड़कों को भारी नुकसान हुआ है और जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ इलाकों में जान-माल की भी हानि की खबरें मिली हैं।

इस विकट परिस्थिति में सरकार और प्रशासन पूरी मुस्तैदी से राहत कार्य में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी नागरिक को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

 

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