ईरान की बढ़ती खुफिया गतिविधियों पर अमेरिका और नाटो देशों की कड़ी चेतावनी

वॉशिंगटन: अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों ने ईरान पर यूरोप और उत्तरी अमेरिका में खुफिया गतिविधियों के जरिए गंभीर खतरों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें ईरानी खुफिया एजेंसियों द्वारा पत्रकारों, यहूदी नागरिकों, विरोधियों और पूर्व/वर्तमान अधिकारियों को निशाना बनाए जाने की निंदा की गई है।

बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “हम ईरानी खुफिया एजेंसियों द्वारा हत्या, अपहरण और उत्पीड़न के प्रयासों का एकजुट होकर विरोध करते हैं। यह हमारी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है।”

बयान में यह भी बताया गया कि ईरानी एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों के साथ मिलकर ऐसे तत्वों को निशाना बना रही हैं जो तेहरान की नीतियों से असहमति रखते हैं। इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” बताते हुए नाटो देशों ने चेतावनी दी कि ऐसे किसी भी हमले को संप्रभुता के खिलाफ सीधा हमला माना जाएगा।

किन देशों ने किया समर्थन

इस संयुक्त बयान पर अमेरिका सहित नाटो के 13 सदस्य देशों — अल्बानिया, बेल्जियम, ब्रिटेन, कनाडा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, स्पेन, स्वीडन और अमेरिका — ने हस्ताक्षर किए हैं। इनके अलावा ऑस्ट्रिया, जो नाटो सदस्य नहीं है लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का मुख्यालय है, ने भी समर्थन जताया है।

ब्रिटेन और जर्मनी से जुड़े मामले

ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने हाल के वर्षों में ईरान से प्रायोजित कई साजिशों की जानकारी दी है। फिलहाल तीन संदिग्ध ईरानी जासूसों पर आरोप है कि वे ब्रिटेन में पत्रकारों की निगरानी और हमले की योजना बना रहे थे। ब्रिटिश संसद की इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी कमेटी ने हाल में कहा कि *“ईरान एक व्यापक, निरंतर और अप्रत्याशित खतरा बन चुका है।”

इसी महीने जर्मन अभियोजकों ने जानकारी दी थी कि डेनमार्क में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित रूप से बर्लिन में यहूदी ठिकानों और व्यक्तियों की जानकारी जुटा रहा था।

निष्कर्ष

नाटो और अमेरिका की यह सख्त चेतावनी इस बात का संकेत है कि पश्चिमी देश अब ईरानी खुफिया गतिविधियों को एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय चुनौती के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर वैश्विक कूटनीतिक और सुरक्षा स्तर पर और भी तेज प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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