सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
भारत के 12 लाख से ज्यादा केमिस्टों की आवाज, आल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD), ने ऑनलाइन फार्मेसियों के तथाकथित अवैध कारोबार के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है! आरोप लगाया गया है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्चे के नशीली और खतरनाक दवाइयों की बिक्री, बिना लाइसेंस के स्टॉक, और गुणवत्ता की कोई गारंटी न होना—ये सब जन स्वास्थ्य के लिए एक ‘टिकटिक करता बम’ साबित हो सकता है।AIOCD ने स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने GSR 220(E) और GSR 817(E) जैसे पुराने नियमों को वापस लेने की अपील की, जिनका दुरुपयोग अवैध ई-फार्मेसियां कर रही हैं।
जे.एस. शिंदे (अध्यक्ष) और राजीव सिंघल (महासचिव) ने चेतावनी दी कि ये प्लेटफॉर्म बिना डॉक्टर की सलाह के नशीली दवाएं बेच रहे हैं, जो न केवल गैरकानूनी है, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहा है।
क्या है मांग?
अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों पर तत्काल रोक।
पुराने नियमों को खत्म कर नई, सख्त नीतियां लागू करना।
राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों (SLA) द्वारा ठोस कार्रवाई।
CDSCO से केंद्रीकृत जांच और प्रवर्तन।
AIOCD का कहना है, “दवाइयां कोई साधारण सामान नहीं हैं। इन्हें ऑनलाइन ‘शॉपिंग कार्ट’ में नहीं बेचा जाना चाहिए!” संगठन ने चेताया कि अगर समय रहते कार्रवाई न हुई, तो देश एक बड़े स्वास्थ्य संकट की चपेट में आ सकता है।
क्या आपकी अगली दवा सुरक्षित है? यह सवाल अब हर भारतीय के लिए अहम है। AIOCD की इस मुहिम से क्या बदलेगा दवा बाजार का खेल? आइए, इंतजार करें और देखें!