नई दिल्ली। घर में मकड़ी के जाले लगना आम बात मानी जाती है और अधिकतर लोग इसे केवल गंदगी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र में मकड़ी के जालों को नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ संकेतों से जोड़कर देखा गया है। यही कारण है कि पुराने समय से बड़े-बुजुर्ग घर के हर कोने को साफ और जालों से मुक्त रखने की सलाह देते आए हैं।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, जहां मकड़ी के जाले बनते हैं वहां धीरे-धीरे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ने लगता है। इसका असर घर की सुख-शांति, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक माहौल पर पड़ सकता है। मान्यता है कि जाले घर में दरिद्रता और मानसिक तनाव को बढ़ावा देते हैं।
विशेष रूप से पूजा घर में जाले लगना बेहद अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे पूजा-पाठ में बाधाएं आती हैं और घर की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होने लगती है। वहीं रसोई घर में चूल्हे या गैस के आसपास मकड़ी के जाले बनने को अन्न और धन की कमी का संकेत माना गया है। इसका असर परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि पर भी पड़ सकता है।
वास्तु शास्त्र में घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण को स्थिरता और शक्ति का स्थान माना गया है। यदि इस दिशा में मकड़ी जाला बना ले, तो यह घर के मुखिया के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकता है। इसके अलावा बाथरूम में जाले लगना पेट और पाचन संबंधी समस्याओं का संकेत माना जाता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यदि पूर्वजों की तस्वीरों पर जाले लग जाएं, तो इसे पितृ दोष और पूर्वजों की नाराजगी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी स्थिति घर के सदस्यों के जीवन में बाधाएं और तनाव बढ़ा सकती है।
इन नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए घर की नियमित साफ-सफाई बेहद जरूरी मानी गई है। खासकर छत के कोनों, अलमारियों के पीछे और फर्नीचर के नीचे जमे जालों को तुरंत हटाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, पोछा लगाते समय पानी में थोड़ा नमक मिलाने से भी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है।