हरिद्वार: देश में दिन-ब-दिन बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाओं ने अब पुलिसकर्मियों को भी अपने जाल में फँसाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला हरिद्वार जनपद के मंगलौर क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक पुलिसकर्मी के मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर अज्ञात साइबर ठग ने उसके बैंक खाते से लगभग 80 हजार रुपये निकाल लिए। घटना के बाद पीड़ित पुलिसकर्मी ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन और स्थानीय कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित पुलिसकर्मी की पहचान अंकित तोमर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से देहरादून जनपद के चकराता तहसील स्थित ग्राम कोटी के निवासी हैं। वर्तमान में वह हरिद्वार जिले के मंगलौर कोतवाली में तैनात हैं। अंकित तोमर ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 16 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2 बजे उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा एक लिंक भेजा गया।
पीड़ित के अनुसार, लिंक पर क्लिक करने के कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल नंबर से संबंधित ई-सिम किसी अन्य डिवाइस पर सक्रिय हो गई। ई-सिम एक्टिवेशन के जरिए साइबर ठग ने उनके मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी और बैंकिंग अलर्ट्स पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इसके बाद अज्ञात साइबर अपराधी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की देहरादून शाखा स्थित उनके सैलरी खाते से कई यूपीआई ट्रांजेक्शनों के माध्यम से कुल 80,000 रुपये की रकम निकाल ली।
घटना की जानकारी होते ही पुलिसकर्मी अंकित तोमर ने सबसे पहले साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके पश्चात उन्होंने मंगलौर कोतवाली में एक तहरीर देकर अज्ञात साइबर अपराधी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस मामले की पुष्टि करते हुए मंगलौर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक शांति कुमार गंगवार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने तकनीकी जानकारी का उपयोग कर ई-सिम को एक्टिवेट किया और बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी प्राप्त की।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों को दर्शाता है। ई-सिम फ्रॉड जैसे मामलों में मोबाइल नंबर के जरिए बैंक खातों तक पहुंचना अब अपराधियों के लिए आसान होता जा रहा है। इसीलिए लोगों को अनजान लिंक, कॉल या मैसेज से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ई-सिम एक्टिवेशन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को बिना पुष्टि किए पूरा करना खतरनाक हो सकता है। इसके लिए मोबाइल सेवा प्रदाता से संपर्क कर सतर्कता बरतनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस आरोपी की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।