हरिद्वार कांवड़ यात्रा में मिसाल बनी पुलिस: बिछड़े बच्चों को मिलाया परिजनों से, लोगों ने जताया आभार

हरिद्वार। धार्मिक आस्था और समर्पण का प्रतीक कांवड़ यात्रा जहां लाखों श्रद्धालुओं को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर देती है, वहीं भारी भीड़-भाड़ और अव्यवस्था के कारण कई बार यात्री अपने परिजनों से बिछड़ भी जाते हैं। ऐसे में हरिद्वार पुलिस एक बार फिर संवेदनशीलता और सेवा भाव की मिसाल पेश कर रही है। बीते शनिवार को पुलिस ने अलग-अलग मामलों में तीन मासूम बच्चों को उनके परिजनों से सकुशल मिलवाया, जिससे उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई।

8 साल की खुशी सकुशल परिजनों से मिली

शनिवार को मुजफ्फरनगर निवासी खुशी (8 वर्ष), जो एक कांवड़ यात्रा में अपने परिजनों के साथ आई थी, भीड़ में बिछड़ गई। वह अकेली और डरी हुई हालत में नारसन बॉर्डर के पास लोगों को मिली। स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे नारसन बॉर्डर चौकी पर पहुंचाया, जहां पुलिस ने बेहद संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही शुरू की।

पुलिस ने बच्ची से बातचीत के दौरान प्राप्त सीमित जानकारी के आधार पर उसका पता लगाने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद पुलिस को पता चला कि खुशी के पिता का नाम सचिन पुत्र पूर्ण है और वे ग्राम टोडा कल्याणपुर थाना रतनपुरी, जिला मुजफ्फरनगर के निवासी हैं। पुलिस को उनका मोबाइल नंबर भी प्राप्त हुआ, जिसके माध्यम से संपर्क कर उन्हें चौकी पर बुलाया गया। पिता के पहुंचने पर खुशी को सकुशल सुपुर्द किया गया। बेटी को वापस पाकर पिता की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने पुलिस का आभार जताया।

10 वर्षीय माही को जीजा से मिलवाया

दूसरे मामले में कांवड़ यात्री दीपक ने नहर पुल मंगलौर स्थित पुलिस सहायता केंद्र पर सूचना दी कि उसकी 10 वर्षीय साली माही भारी भीड़ में बिछड़ गई है। पुलिस ने सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची की तलाश शुरू की। कई जगहों पर पूछताछ और गश्त के बाद गुड़ मंडी के पास बच्ची को सकुशल ढूंढ लिया गया।

बच्ची को वापस लाकर दीपक के सुपुर्द किया गया, जो उसका जीजा है। बच्ची को सही सलामत पाकर दीपक ने पुलिस टीम का धन्यवाद किया। इस कार्यवाही में अपर उप निरीक्षक नरेंद्र राठी, कांस्टेबल पुनीत सेमवाल और राजेंद्र नेगी शामिल रहे।

4 वर्षीय तन्नु भी माता-पिता से मिला

तीसरे मामले में एक करीब 4 वर्षीय बालक तन्नु नहर पुल मंगलौर स्थित पुलिस सहायता केंद्र पर रोता हुआ मिला। बच्चा अपने माता-पिता के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पा रहा था। पुलिस ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की और आसपास के क्षेत्रों में लाउडस्पीकर और गश्त के जरिए बच्चे के माता-पिता की तलाश की।

कुछ घंटों की मेहनत के बाद पुलिस ने देवबंद तिराहा से आगे पानी की टंकी के पास बच्चे के पिता प्रमोद को ढूंढ निकाला। प्रमोद को जब बताया गया कि उनका बेटा मिल गया है, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। तन्नु को सकुशल उनके पिता के सुपुर्द किया गया।

इस कार्रवाई में पुलिस की टीम में अपर उप निरीक्षक नरेंद्र राठी, कांस्टेबल विजय यादव, पीआरडी जवान उपेंद्र, फसीउजमा, एसपीओ जनेश्वर गिरी, और सुमित आर्य शामिल रहे।

भावुक हुए परिजन, पुलिस की सराहना

हरिद्वार पुलिस की इस संवेदनशील और तत्परता भरी कार्यशैली की जमकर सराहना हो रही है। बच्चों को उनके परिजनों से मिलते देख हर कोई भावुक हो गया। ऐसे प्रयास न केवल पुलिस की कार्यकुशलता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि सेवा, सुरक्षा और सहयोग के सिद्धांतों पर काम कर रही पुलिस वाकई में समाज का एक अहम स्तंभ है।

निष्कर्ष

कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में हरिद्वार पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मानवीय संवेदनाओं के साथ आम लोगों की मदद करने में भी तत्पर हैं। बिछड़े बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाकर पुलिस ने जो कार्य किया है, वह प्रशंसनीय ही नहीं बल्कि प्रेरणादायक भी है।

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