समाज के नेता भाजपा की विभाजन और नफरत की राजनीति का शिकार
कांकेर। जिला के पखांजूर तहसील के पुलिस प्रशासन द्वारा प्रत्येक पंचायतों में बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर प्रशासन को सूचित करने की आदेश का विरोध करते हुए राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के राज्य अध्यक्ष देवचंद भास्कर और महासचिव ओम प्रकाश देवांगन ने कहा कि प्रशासन का यह नोटिस बंगबंधुओं को आतंकित करने का प्रयास है साथ उन्होंने सर्व आदिवासी समाज के नेताओं को नसीहत दी कि समाज के नेताओं को सत्ताधारी पार्टी की चाटुकारिता करने के बदले समाज के गरीब जनता के भलाई के दिशा में कार्य करें ।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के कांकेर जिला के अलावा नारायणपुर,कोंडागांव,सुकमा जिला में भी ग्रामीण इलाकों में निवासरत बांग्लाभाषी लोगों के साथ प्रताड़ना किया जा रहा है। भाजपा की सांप्रदायिक नीति के चलते बस्तर संभाग में पहले धर्मांतरण के नाम पर ईसाई समुदायों को निशाना बनाया जाता रहा है अब बांग्लाभाषियों को भाजपा ने निशाने के केंद्र में रखा है।
नेताओं ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार पूरे देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ने के नाम पर बांग्लाभाषी लोगों को प्रताड़ित कर उन्हें आतंकित करने का काम कर रही है। भारत के वैध दस्तावेज होने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार कर कुछ लोगों को बांग्लादेश भेजने का प्रयास भी किया गया है।गौरतलब है कि यह सभी प्रवासी मजदूर के रूप में देश के विभिन्न प्रांतों में कार्य करते है जिसमें अधिकतर मजदूर निर्माण कार्यों से जुड़े है। खासकर पूरे देश में बांग्लाभाषी मुस्लिमों को भाजपा की सरकार अपना निशाना बना रही है। प्रदेश के बस्तर संभाग में बंगाली और आदिवासियों के बीच सद्भावनापूर्ण वातावरण को नष्ट करने में यह सरकार और भाजपा जुटी हुई है।
नेताद्वय ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब केंद्र की सरकार की सेना सीमाओं की चौकसी करती है तो इसके बाद भी अगर बांग्लादेश के घुसपैठिया भारत में घुस आ रहे है तो इसकी विफलता केंद्र की मोदी सरकार की है।अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने के लिए अब देश में बंगाली विरोधी वातावरण निर्मित कर अपनी राजनैतिक रोटी सेंक रहा है।
मजदूर नेताओं ने कहा कि प्रशासन द्वारा पंचायत को इस तरह खुली छूट देने का मतलब पंचायत को यह अधिकार मिल जाता है कि वे विरोधियों को अपने निशाना बनाएगा।दूसरी तरफ जिला में 5 वीअनुसूची लागू होने के कारण सभी पंचायत के प्रमुख आदिवासी ही है। और आदिवासी समाज के नेता जिस तरह बांग्लाभाषियों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे है उससे सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को ही नष्ट करेगा।
यूनियन के नेताओं ने कहा तथाकथित स्वयंभू समाज के ठेकेदार आदिवासी समाज के गरीब जनता के अधिकारों पर चुप्पी साधकर समाज का हितैषी बने घूम रहे है।उन्होंने कहा कि यह समाज के ठेकेदार उस समय कहा नदारत हो जाते है जब आदिवासियों की वनोपज का वाजिब दाम,तेंदू पत्ता का उचित दाम और बोनस का भुगतान नहीं होता है,यह समाज के ठेकेदार वनभूमि के पट्टा के लिए आवाज नहीं उठाते है आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार पर इनके मुंह नहीं खुलते लेकिन एक विशेष राजनैतिक पार्टी की राजनैतिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए वे सामने आ गए है।
मजदूर नेताओं ने राज्य सरकार से सवाल दागते हुए कहा कि जिन नागरिकों के पास आधारकार्ड,राशन कार्ड,मतदाता परिचयपत्र,और जमीन का मालिकाना हक है वे कैसे घुसपैठिया हो सकते है?
उन्होंने कहा कि भाजपा की विभाजन और नफरत की राजनीति के खिलाफ मजदूर संगठन जनता के बीच प्रचार अभियान संचालित कर आवश्यकता होने पर आंदोलन करेगी।