सुप्रीम कोर्ट ‘उदयपुर फाइल्स’ मामले पर शीघ्र सुनवाई के लिए सहमत

फिल्म रिलीज पर उच्च न्यायालय की रोक को चुनौती

नई दिल्ली ।उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को हिंदी फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स – कन्हैयालाल लाल टेलर मर्डर’ के रिलीज पर लगी रोक के खिलाफ दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई की सहमति दी। यह मामला फिल्म की रिलीज को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की चुनौती से संबंधित है, जिसमें फिल्म की रिलीज को 12 घंटे पहले रोक दिया गया था। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव भाटिया की शीघ्र सुनवाई की मांग पर कहा कि यह मामला एक या दो दिन में सूचीबद्ध किया जा सकता है।

फिल्म रिलीज पर रोक, क्या है मामला?

यह फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ उस संवेदनशील घटना पर आधारित है, जिसमें राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल नामक टेलर की निर्मम हत्या कर दी गई थी। फिल्म की कहानी इस मर्डर के संदर्भ में है, और इसमें आरोप है कि यह फिल्म सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ हो सकती है, जो मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का काम करती है।

इस फिल्म के निर्माता ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 10 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें फिल्म की निर्धारित रिलीज़ (11 जुलाई) से एक दिन पहले उसे रोकने का आदेश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। इन याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया था कि फिल्म को रिलीज करने से सांप्रदायिक हिंसा और नफरत फैल सकती है, खासकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ।

उच्च न्यायालय का आदेश और केंद्र का रुख

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि यदि फिल्म के निर्माता केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के प्रमाणपत्र को चुनौती देना चाहते हैं, तो वे केंद्र सरकार के पास पुनर्विचार याचिका दायर कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फिल्म में कोई संशोधन किए जाते हैं और केंद्र सरकार इस पर फैसला करती है, तो फिल्म की रिलीज़ पर लगी रोक जारी रहेगी। इस आदेश के बाद, फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति और जटिल हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

यह फिल्म पहले 11 जुलाई को रिलीज होने वाली थी, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश के बाद फिल्म के निर्माता को अपने प्रचार अभियान और रिलीज की तारीख को स्थगित करना पड़ा। फिल्म के निर्माता ने इस रोक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, और सोमवार को फिल्म के वकील गौरव भाटिया ने विशेष उल्लेख करते हुए कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि फिल्म के रिलीज से 12 घंटे पहले यह आदेश आया था, जिससे भारी नुकसान हो रहा है।

इस पर उच्चतम न्यायालय ने मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए सहमति दी, और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यह मामला जल्द ही सूचीबद्ध किया जाएगा।

पहले की सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट का रुख

यह पहली बार नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उस समय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मोहम्मद जावेद द्वारा दायर याचिका पर तत्काल विचार करने से मना कर दिया था, लेकिन अदालत ने उनके अधिवक्ता से कहा था कि वे इस मामले का उल्लेख 14 जुलाई के बाद कर सकते हैं, जब अदालतें गर्मी की छुट्टियों के बाद फिर से सामान्य रूप से खुलेंगी।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और आगामी सुनवाई

अब, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की सहमति दी है, जो कि फिल्म के निर्माता और आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकता है। फिल्म की रिलीज पर लगी रोक का मामला अभी भी एक गंभीर सवाल बनकर सामने आया है, क्योंकि यह फिल्म न केवल एक वास्तविक घटना पर आधारित है, बल्कि यह फिल्म के निर्माता के रचनात्मक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ा है।

अदालत में इस मामले की सुनवाई के बाद ही यह तय हो सकेगा कि ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म को रिलीज किया जा सकता है या नहीं, और क्या इस पर रोक जारी रहेगी। वहीं, फिल्म के निर्माता और उसके समर्थक इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे अपनी फिल्म को व्यापक दर्शकों तक पहुंचा सकें।

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