सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
आमतौर पर ऐसा नहीं होता कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका का राष्ट्रपति अपने समकक्ष विदेशी नेता की बजाय पाकिस्तान जैसे अस्थिर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले मुल्क के सेनाध्यक्ष को इतना महत्व दे। लेकिन 18 जून 2025 को व्हाइट हाउस में यह घटना घट गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बंद कमरे में मुलाकात ने भारत, पाकिस्तान और वैश्विक कूटनीति पर कई सवाल उठाए हैं। यह मुलाकात, जो बिना किसी नागरिक प्रतिनिधि के हुई, असामान्य और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
संदर्भ:
यह मुलाकात भारत-पाक तनाव और ईरान-इज़राइल युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई। भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ा, युद्ध जैसे हालात पैदा हो गये। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाक “परमाणु युद्ध” को रोका, जिसे भारत ने खारिज करते हुए कहा कि युद्धविराम द्विपक्षीय सैन्य संवाद से हुआ।
भारत के लिए चेतावनी:
ट्रंप का पाकिस्तानी सेना प्रमुख से मिलना भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत ने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और किसी भी मध्यस्थता को खारिज किया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि मई 2025 का युद्धविराम भारत-पाक सैन्य संवाद का परिणाम था, न कि अमेरिकी हस्तक्षेप का। इस मुलाकात से भारत को अपनी कूटनीतिक और सैन्य सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता है।
पाकिस्तान में सेना की सत्ता:
यह मुलाकात दर्शाती है कि पाकिस्तान में सैन्य नेतृत्व, विशेष रूप से आसिम मुनीर, रणनीतिक निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाता है। स्टिमसन सेंटर (2023) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और नीतियों पर सेना का प्रभाव रहा है। हालांकि, इस पर पूर्ण नियंत्रण का दावा सत्यापित नहीं है।
नोबेल पुरस्कार की चापलूसी:
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि मुनीर ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की सिफारिश की, यह दावा करते हुए कि ट्रंप ने भारत-पाक “परमाणु युद्ध” को रोका। यह सिफारिश रणनीतिक चापलूसी का हिस्सा प्रतीत होती है, क्योंकि नोबेल समिति के नियमों के अनुसार, सैन्य अधिकारी नामांकन के लिए योग्य नहीं हैं। ट्रंप ने इस प्रशंसा का स्वागत करते हुए कहा, “मैंने दो परमाणु देशों के बीच युद्ध रोका।” यह बयान उनकी अप्रत्याशित कूटनीति और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
ईरान-इज़राइल और अमेरिकी रणनीति:
रॉयटर्स के अनुसार, मुलाकात में ईरान-इज़राइल युद्ध पर चर्चा हुई, जिसमें पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और ईरान से संबंध महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप ने कहा, “पाकिस्तान ईरान को अच्छी तरह जानता है।” यह संकेत देता है कि अमेरिका संभवतः ईरान के खिलाफ रणनीति में पाकिस्तान के सैन्य समर्थन की तलाश कर रहा है।
विश्लेषण:
ट्रंप की कूटनीति अवसरवादी और अप्रत्याशित रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक डेरेक ग्रॉसमैन ने X पर टिप्पणी की, “ट्रंप की यह मुलाकात नोबेल पुरस्कार की चाहत और क्षेत्रीय कूटनीति की गलत समझ को दर्शाती है।”
भारत के लिए यह स्थिति जटिल है, क्योंकि उसे अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखते हुए रूस और अन्य सहयोगियों के साथ संतुलन बनाना होगा। पाकिस्तान में, यह मुलाकात सेना की सत्ता को और मजबूत करती है, जैसा कि डॉन अखबार ने इसे “रणनीतिक जीत” बताया।
निष्कर्ष:
यह मुलाकात अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं, पाकिस्तान में सेना की भूमिका, और ट्रंप की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को उजागर करती है। मुनीर की नोबेल सिफारिश चापलूसी का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में पाकिस्तान की उपयोगिता को रेखांकित करती है। भारत को अपनी नीतियों को और सुदृढ़ करना होगा।