असम के सीएम का निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश, बिल पेमेंट के नाम पर नहीं रोक सकते मरीज का शव

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों की मनमानी पर करारा प्रहार करते हुए एक सनसनीखेज फैसला सुनाया है, जिसने पूरे देश के लिये एक मिसाल पेश की है! इसके मुताबिक राज्य में अब कोई भी निजी अस्पताल बकाया बिल के कारण मृत मरीजों के शव को रोक नहीं सकता। इस अमानवीय और संवेदनहीन प्रथा को सीएम ने न केवल गैरकानूनी करार दिया, बल्कि इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत अपराध भी घोषित किया है।
“पैसे के लिए इंसानियत को दांव पर लगाना बर्दाश्त नहीं!”
गुवाहाटी में मीडिया से एक मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “यह शर्मनाक है कि कुछ निजी अस्पताल आर्थिक लाभ के लिए मृतकों और उनके परिवारों की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। शव को रोकना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह कानूनन अपराध है।” उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसा करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हेल्पलाइन की घोषणा: अब पुलिस होगी एक कॉल दूर
इस फैसले को और मजबूत करते हुए, सीएम ने घोषणा की कि असम सरकार जल्द ही एक समर्पित हेल्पलाइन शुरू करेगी। इस हेल्पलाइन के जरिए मृतक के परिजन तुरंत शिकायत दर्ज करा सकेंगे, और पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी। यह कदम उन परिवारों के लिए राहत की सांस लेकर आया है, जो आर्थिक तंगी के कारण निजी अस्पतालों की इस अमानवीय हरकत का शिकार बनते थे।
क्यों जरूरी था यह कदम?

पिछले कुछ वर्षों में असम सहित देश के कई हिस्सों में निजी अस्पतालों द्वारा बकाया बिल के कारण शव रोकने की अनेक घटनाएं सामने आईं थीं। इन घटनाओं ने न केवल मृतकों के परिवारों को भावनात्मक रूप से आहत किया, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर भी सवाल उठाए। कई मामलों में गरीब परिवारों को अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए अस्पतालों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ा। मुख्यमंत्री का यह फैसला ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

जनता का जोरदार समर्थन, देशभर में चर्चा

असम की जनता ने इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “इंसानियत की जीत” और “निजी अस्पतालों की लूट पर लगाम” करार दे रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने मांग की है कि इस तरह का नियम पूरे देश में लागू किया जाए। एक स्थानीय निवासी, रमेश बरुआ ने कहा, “यह फैसला उन गरीब परिवारों के लिए बहुत बड़ा सहारा है, जो पहले ही दुख की घड़ी में टूट चुके होते हैं। सीएम ने सचमुच दिल जीत लिया।”

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला निजी अस्पतालों की जवाबदेही बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। गुवाहाटी के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, “यह कदम न केवल मरीजों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और मानवता को भी बढ़ावा देगा।”

आगे क्या?

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार निजी अस्पतालों की अन्य अनियमितताओं पर भी नजर रख रही है। भविष्य में और सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ और सम्मानजनक बन सकें। इस बीच, हेल्पलाइन के शुरू होने का इंतजार है, जिसके बाद इस फैसले का असर और स्पष्ट होगा।

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