देहरादून । एग्रीकसार ग्रीन टेक सॉल्युशन, ग्राम घनेली , पोस्ट हवालबाग , अल्मोड़ा से वी.एल. पॉली सीमेंट टैंक के उत्पादन के लिए भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, अल्मोड़ा-263601 द्वारा लिखित समझौता किया गया है।
पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा ही जल का मुख्य स्रोत है। वर्षा के पर्याप्त मात्रा में होने के वाबजूद भी पर्वतीय भागों में सिंचाई व पेयजल की भारी कमी है। उत्तराखण्ड के पर्वतीय जिलों में कुल बुवाई क्षेत्रफल का मात्र 10 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंचित है। पर्वतीय भागों में भूमिगत जल बहुत कम है। पिछले कुछ समय से पर्यावरण में हो रहे प्राकृतिक व मानवजनित परिवर्तनों से प्राकृतिक जल स्रोत (नौले व धारे आदि) सूख रहे हैं और कुछ पूर्णतया सूख गये हैं। जो शेष हैं उनका जल बहाव व उपलब्धता अत्यधिक कम हो गयी है।
विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में सन् 1982 से चल रहे अखिल भारतीय जल प्रबन्ध परियोजना के अन्तर्गत पॉलीटैंकों के निर्माण पर अनुसंधान कार्य कर रहा है। देखा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बनाये जाने वाले सीमेंट टैंक भूकम्प या मिट्टी के कटाव से जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं व इनके निर्माण में लागत (रु. 7-10 प्रति लीटर) भी अधिक आती है। एक बार क्षतिग्रस्त होने के बाद इनकी मरम्मत करना सम्भव नहीं होता है। जबकि पॉलीटैंक सस्ते (रु. 1-2 प्रति लीटर) व भूकम्प से कम क्षतिग्रस्त होते हैं। पॉलीटैंक में एकत्रित जल का इस्तेमाल घरेलू उपयोग, पशुपालन, मत्स्य-पालन व फसलों की सिंचाई हेतु किया जा सकता है।
कम से कम 20 घन मीटर व आवश्यक्ता अनुरूप उपलब्ध स्थान व संसाधन के अनुसार 20 से लेकर 500 घनमीटर या इससे अधिक क्षमता के टैंक भी बनाये जा सकते हैं। 20 घन मीटर क्षमता वाले टैंक को एक बार पानी से भरने पर 400 वर्ग मीटर क्षेत्र (दो नाली क्षेत्र) में 5 सेमी० की एक सिंचाई की जा सकती है। पॉलीटैंक के पानी का सिंचाई में पूर्ण दक्षता से उपयोग करने हेतु उसके नीचे के खेत में टैंक के आउटलैट पाईप से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को जोड़ा जा सकता है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली में पानी को बहुत कम दाब पर बार-बार व सीधे पौधे की जड़ में दिया जाता है। इस प्रणाली में पौधे को जब एवं जितनी जल की आवश्यकता होती है उसे तब उतना ही जल उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार जल की हानि नहीं होने पाती है।
वी.एल. पॉली सीमेंट टैंक के उत्पादन तथा विक्रय के लिए उक्त कम्पनी के साथ 02.02.2024 को हुए समझौते में भाकृअनुप-वि.प.कृ.अनु. संस्थान, के निदेशक डा. लक्ष्मी कान्त, चेयरमैन आई.टी.एम.यू. डॉ निर्मल कुमार हेडाउ तथा कंपनी के सचिव श्री बब्बू लाल आर्या ने हस्ताक्षर किये। आर्या के अनुसार निःसंदेह संस्थान की यह उपलब्धि किसान की आय वृद्धि में एक मील का पत्थर साबित होगी, जिस पर हम सभी गर्व कर सकेंगे। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक ने उनको बधाई देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की।