अनियंत्रित आर्थिक वृद्धि जलवायु विनाश को आमंत्रण : डॉ.रवि चौपड़ा

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से सभागार में  सुपरिचित पर्यावरणविद डॉ.रवि चोपड़ा द्वारा पारिस्थितिकी, संस्कृति और सतत विकास विषय पर स्लाइड- शो पर आधारित एक व्याख्यान आज सायं संस्थान के सभागार में दिया गया। जलवायु (jalavayu) विज्ञान, जलवायु की राजनीति और उत्तराखंड (Uttarakhand) में संभावित जलवायु प्रभाव पर अपने व्याख्यान में डॉ. रवि चोपड़ा (Dr. Ravi Chopra) ने कहा, “उत्तराखंड में मुख्य सीमा थ्रस्ट और मुख्य केंद्रीय थ्रस्ट के क्षेत्रों में उच्च तीव्रता केंद्रित वर्षा ने ढलान अस्थिरता को काफी बढ़ा दिया है।

उन्होंने आगे कहा, “सामान्य तौर पर पर्वतीय क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। उत्तराखंड में जल्दबाजी में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यटन पर जोर देने से राज्य में जोखिम बढ़ गया है।

इससे पहले, जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय वार्ता पर चर्चा करते हुए डॉ. चोपड़ा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब दुनिया वैश्विक जलवायु आपदाओं की ओर बढ़ रही थी, तब भी राष्ट्र घरेलू राजनीतिक (political ) चिंताओं और राष्ट्रीय हितों को वैश्विक भलाई से ऊपर रख रहे थे। हाल के वर्षों में औद्योगिक राष्ट्र ऐतिहासिक प्रदूषक के रूप में खुद को दोषी ठहराते हुए भारत और चीन पर मढ़ रहे हैं क्योंकि वे दुनिया में क्रमशः सबसे अधिक और तीसरे सबसे अधिक CO2 उत्सर्जित करने वाले देश बनकर उभरे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के भीतर भारतीय आबादी का अनुमानित एक प्रतिशत, सबसे अमीर वर्ग, गरीबों के प्रति व्यक्ति उत्सर्जन से कई गुना अधिक उत्सर्जन करता है। “यह लगभग असंभव है। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि यदि भारत को अपने 800 मिलियन से अधिक गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकालना है तो उसे अपने उत्सर्जन में उल्लेखनीय रूप से कमी लानी होगी । 

अपने सार गर्भित व्याख्यान में डॉ. चोपड़ा ने उत्तराखंड हिमालय (the Himalayas ) की महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक और भौगोलिक विशेषताओं पर तथ्यपरक प्रकाश डाला।  व्याख्यान के बाद सभागार में उपस्थित लोगों द्वारा इस विषय के सन्दर्भ में डॉ.रवि चोपड़ा से अनेक सवाल-जबाब भी किये।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पर्यावरण प्रेमी चन्दन सिंह नेगी,  पद्मश्री और पर्यावरणविद कल्याण सिंह रावत, विजय भट्ट,  निकोलस हॉफ़लैंड , शैलेन्द्र नौटियाल, प्रोग्राम एसोसिएट चंद्रशेखर तिवारी,  सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल नौरिया, सुंदर सिंह बिष्ट,जो चोपड़ा, देहरादून के अनेक प्रबुद्वजन, पर्यावरण प्रेमी,साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और पुस्तकालय में अध्ययनरत अनेक युवा सदस्य भी उपस्थित रहे।

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