देहरादून। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान देहरादून में विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह का उद्घाटन किया गया जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड राज्य के कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के कर कमलों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ टीसीएबी के दृष्टिदिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों द्वारा स्वागत गीत गाकर तथा मुख्य अतिथि विधिवत दीप प्रज्वलित कर औपचारिक उद्घाटन किया गया । मनोविज्ञान विभाग के शोधार्थीयों द्वारा लघु नाटिका के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं का मंचन किया गया।
संस्थान के चिकित्सा एवं पुनर्वास मनोविज्ञान विभाग की प्रवक्ता सुश्री सुनंदा राणा द्वारा संस्थान द्वारा आयोजित किए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य माह के कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई तत्पश्चात तत्पश्चात विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुरेंद्र ढालवाल द्वारा मानसिक स्वास्थ्य उत्थान के क्षेत्र में संस्थान के पिछले 3 वर्षों की उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया ।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा गत 3 वर्षों में 6806 मानसिक स्वास्थ्य संबंधी केसों को देखा गया है जिनमें लगभग 3000 लाभार्थियों को मानसिक दिव्यांगता के प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाए गए हैं इनमें बौद्धिक अक्षमता, ऑटिज्म तथा मनोरोग संबंधी दिव्यांगता के प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाने में विभाग ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
डॉ. ढालवाल ने बताया की विभाग ने संस्थान के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास हेल्पलाइन किरण की स्थापना में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. ढालवाल नें मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के निदान के लिए उचित सेवाओं की मांग तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रोफेशनलस की भारी कमी के गैप को भरने के लिए विभाग द्वारा मानव संसाधन विकास के क्रम में आरम्भ किए गए नए पाठ्यक्रमों को की जानकारी दी जिनमें एमफिल क्लिनिकल साइकोलॉजी, एमफिल रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजी, पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजी तथा विभाग की महत्वाकांक्षि परियोजना के रूप में देश में शुरू किए जाने वाले अपनी तरह के पहले पंचवर्षीय इंटीग्रेटेड बीएससी एमएससी अप्लाइड साइकोलॉजी (जो कि मुख्य रूप से पुनर्वास तथा चिकित्सा मनोविज्ञान पर आधारित है) पाठ्यक्रम की जानकारी भी दी। विभाग गत वर्षों से डीआरडीओ, आइटीबीपी, उत्तराखंड पुलिस, न्यायालयों तथा अन्य सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों को मनोवैज्ञानिक सेवाएं प्रदान कर रहा है । विभाग प्रदेश में उत्तराखंड शासन के साथ मिलकर अनेकों मानसिक दिव्यांगता से संबंधित दिव्यांगता शिविर का आयोजन करता आया है तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता हेतु प्रदेश के विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों हेतु कार्यशालाओं का आयोजन करता आया है। विभाग ना केवल मानसिक दिव्यांग जनों के चिह्नकरण या प्रमाण पत्र बनाने में मदद करता है अपितु मनोवैज्ञानिक चिकित्सा सेवाएं भी प्रदान कर रहा है जिसमें कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी, रैशनल इमोटिव थेरेपी तथा हिप्नोथेरेपी आदि मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियों का इस्तेमाल करता है। अपने स्वागत भाषण में संस्थान के निदेशक डॉ हिमांग्शु दास ने 10 अक्टूबर के दिन के महत्व को समझाया तथा बताया कि किस प्रकार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आने वाले समय में, यदि समय रहते इनका निदान नहीं किया गया तो यह किस प्रकार एक एपिडेमिक का रूप ले सकती है तथा बताया की लगभग हर चौथे व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रोफेशनल हेल्प की आवश्यकता है। डॉ. हिमांग्शु दास ने मंत्री का इस उद्घाटन समारोह में आने हेतु आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंदन राम दास, कैबिनेट मंत्री समाज कल्याण मंत्रालय उत्तराखंड सरकार ने संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रशंसा की तथा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता हेतु संस्थान द्वारा दिए जा रहे योगदान की प्रशंसा की तथा अपेक्षा जताई कि यह संस्थान भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
माननीय मंत्री महोदय ने संस्था द्वारा दिव्यांगजनों हेतु पुनर्वास के समस्त कार्यक्रमों की सराहना करी तथा संस्थान के निदेशक डॉ. हिमांग्शु दास को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु बधाई दी। डॉ सुरेंद्र ढालवाल द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, प्रशिक्षणार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।