नैनीताल। उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले को पशु वध मुक्त क्षेत्र घोषित करने संबंधी सरकार की शासनादेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने रोक ईद के मौके पर सिर्फ हरिद्वार के मंगलौर नगर पालिका क्षेत्र के लिये जारी की है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की युगलपीठ में हुई। यह मामला पहले ही अदालत के विचाराधीन है।
मंगलौर निवासी फैजल हुसैन की ओर से इस मामले में आज हस्तक्षेप करते हुए एक प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि प्रदेश सरकार की ओर से पिछले साल तीन मार्च को एक शासनादेश जारी कर पूरे हरिद्वार जनपद को पशु वध मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। यहां जानवरों के वध पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी।
हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरिगुप्ता की ओर से कहा गया कि 10 जुलाई को बकरीद का पर्व है। बकरीद के पर्व पर मुस्लिम समाज में पशुओं का वध एक धार्मिक परंपरा है। पिछले साल बकरीद के मौके पर मंगलौर क्षेत्र में तमाम प्रतिबंध के बावजूद खुले स्थानों में पशुओं का वध किया गया।
इसके चित्र भी अदालत को उपलब्ध कराये गये। श्री गुप्ता की ओर से यह भी कहा गया कि मंगलौर तीर्थ नगरी हरिद्वार से 45 किमी दूरी पर स्थित है और यहां की 87 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। यही नहीं सरकार के निर्देश पर नगर पालिका की ओर से यहां एक पशुवधशाला का निर्माण किया गया है, लेकिन शासनादेश के चलते यह बंद पड़ा है।
गुप्ता की ओर से बकरीद पर पशुवधशाला में ही पशुओं के वध की मांग की गयी। सरकार की ओर से हालांकि इसका विरोध किया गया और कहा गया कि हरिद्वार एक तीर्थ नगरी है और सरकार को ऐसे मामले में कानून बनाने का अधिकार है। श्री गुप्ता ने बताया कि अंत में अदालत ने तीन मार्च, 2021 के शासनादेश पर रोक लगाते हुए मंगलौर क्षेत्र में सिर्फ बकरीद पर पशु वध की अनुमति जारी कर दी।
