तैरती रही उनकी यादें,16 दिसंबर 1978 को प्रशिक्षण पूरा कर आईएमए से हुए थे पास आउट

देहरादून । भारतीय सैन्य अकादमी में हुई पासिंग आउट परेड को यद्यपि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत अपनी आंखों से नहीं देख पाए हो, पर उनकी यादें अकादमी में तैरती रही।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपने संबोधन के शुरुआत में ही जनरल रावत का स्मरण कर उन्हें असाधारण नेतृत्वकर्ता बताया। पासिंग आउट बैच के जेंटलमैन कैडेटों ने भी ड्रिल स्क्वायर पर अकादमी का निशान झुकाकर और बैंड जनरल रावत नहीं पर अक
की धुन के साथ राष्ट्रगान गाकर अपने सर्वोच्च सेनापति को श्रद्धांजलि दी। बता दें कि जनरल रावत 16 दिसंबर 1978 को ही आईएमए से पास आउट होकर गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में कमीशंड हुए थे। पीआेपी के दिन उन्हें प्रतिष्ठ्ति सोर्ड ऑफ आनर भी मिला था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। 4३ साल की लंबी सैन्य सेवा के दौरान वह सेना में कई अहम पदों पर तैनात रहे। जनरल दलबीर सिंह सुहाग के बाद दिसंबर 2016 में वह थलसेना के 27 प्रमुख बने और 3 दिसंबर 2019 को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त हुए। सेना के आधुनिकीकरण व मजबूती के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इतना जरूर कि सश सेनाओं के एकीकरण के लिए ‘इंटीग्रेटेड थियेटर कमान’ गठित करने व कुछ अन्य महत्वपूर्ण कार्य करने की उनकी हसरत अधूरी ही रही।

नई यूनिफार्म पहनकर परेड में शामिल हुए कैडेट

इस बार आईएमए में हुई पासिं आउट परेड में शामिल जेंटलमैन कैडेट नई यूनिफार्म (ड्रेस) मे दिखे। वैसे दिसंबर में आयोजित होने वाली परेड में कैडेटों को हल्के से हरे रंग की अंगोला ड्रेस पहननी पड़ती है। लेकिन इस बार अंगोला की जगह कैडेट नीले रंग की ब्ल्यू पेट्रोल ड्रिल ड्रेस पहनकर परेड में शामिल हुए। बताया गया कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में हुई परेड के लिए ही कैडेटों के लिए यह यूनिफार्म निर्धारित की गई है।

आसमान से नहीं हुई पुष्पवर्षा

आईएमए से कड़ा सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अंतिम पग पार करते ही जेंटलमैन कैडेटों  के सपने पूरी तरह साकार हो जाते हैं। क्योंकि इसके बाद वह बतौर अफसर सेना में पारी की नई शुरुआत करते हैं।
इस अवसर पर आर्मी ऐवियेशन कोर के तीन हेलीकाप्टर भी आसमान से पुष्पवर्षा कर इन युवा सैन्य अफसरों का अभिनंदन करते हैं। लेकिन इस बार राजकीय शोक के चलते अंतिम पग पार करने के दौरान कैडेटों पर पुष्पवर्षा नहीं हुई।

बग्घी नहीं कार में सवार होकर पहुंचे

 पासिंग आउट परेड के दिन निरीक्षण अधिकारी (रिव्यूइंग आफिसर) ही सबसे खास व्यक्तित्व होता है। इसलिए अकादमी प्रबंधन इनकी मेजबानी में कोई कसर नहीं छोड़ती है। निरीक्षण अधिकारी अक्सर चार घोड़ों वाली बग्घी में सवार होकर द्रोण द्वार से परेड स्थल पहुंचते हैं। लेकिन इस बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बग्घी के बजाय कार में सवार होकर ही परेड स्थल पहुंचे।
बताया गया कि सादगी के लिए राष्ट्रपति बग्घी में बैठकर नहीं आए। उनसे पहले उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी द्रोण द्वार से ही परेड स्थल पहुंचे।
पीपिंग व ओंथ सेरेमनी से मीडिया को रखा दूर
 आईएमए के चेटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित होने वाली परेड (मार्च पास्ट) के बाद निजाम पवेलियन में पीपींग व ओनथ सेरेमनी होती है।
जहां पर स्वजन अपने लाडलों के कंधों पर पीप्स (सितारे) चढ़ाते हैं और जेंटलमैन कैडेट से लेफ्टिनेंट बनने वाले युवा देश की रक्षा के लिए मर-मिटने की शपथ लेते हैं। उत्सव व जश्न के इस पूरे दृश्य को कैमरों में कैद करने की होड़ लगी रहती। लेकिन इस बार अकादमी प्रबंधन ने पीपींग व ओंथ सेरेमनी इंटरनल आयोजित की। इसमें मीडिया कर्मियों को जाने की अनुमति नहीं थी। कैडेटों के स्वजन, अकादमी के अधिकारी व प्रशिक्षक ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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