कदम कदम बढ़ाये जा खुशी के गीत गाये जा…
शनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में हुई पासिंग आउट परेड
- जोश व जज्बे से भरपूर दिखे जेंटलमैन कैडेट
- माटी चूम कर ली देश की रक्षा की शपथ
- कोरोना संकट के चलते परिजन नहीं हो सके शामिल
- सैन्य अधिकारियों व प्रशिक्षकों ने बढ़ाया कैडेटों का उत्साह
देहरादून । भारत माता तेरी कसम तेरे रक्षक हैं हम…। जी हां, कदम से कदम मिलाते हुए 341 युवा जांबाजों की टोली देश की सरहदों की हिफाजत के लिए आगे बढ़ निकली है। बाजुओं में शक्ति, शरीर में फौलाद और इरादों से उभरा हुआ सीना। हिम्मत व हौसले के साथ आगे बढ़ते कदम और हाथों में उमंग। यूं लग रहा था कि देश की धडक़न अब इन युवाओं की सांस ही बन गई है।
मौसम का बिगड़ा मिजाज भी इन युवा जांबाजों के कदमों को डिगा न सका। शनिवार सुबह को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में हुई पासिंग आउट परेड के दौरान आसपास के वातावरण में देशभक्ति की ऐसी ही महक घुलती रही।
इतना जरूर कि कोरोना महामारी के चलते इस बार दर्शक दीर्घा में बैठकर उत्साह बढ़ाने वालों में इन युवाओं के स्वजन मौजूद नहीं रहे। ऐसे में अकादमी के सैन्य अधिकारियों, प्रशिक्षकों व उनके पारिवारिक सदस्यों तथा जूनियर कैडेटों ने पास आउट हो रहे इन कैडेटों का उत्साह बढ़ाया। इसके बाद वीरता, विवेक व शौर्य का सूत्रवाक्य लिए युवा जांबाज बतौर लेफ्टिनेंट भारतीय थलसेना का अभिन्न अंग बन गये हैं।
अकादमी के ऐतिहासिक चेटवुड इमारत के सामने ड्रिल स्क्वायर पर ह्यकदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा, ए जिंदगी है कौम की और सारे जहां से अच्छा है हिन्दोस्तां हमारा…गीत की धुन पर कदमताल करते हुए युवाओं का जोश व जज्बा बयां कर रहा था कि भारत माता की रक्षा के लिए ये युवा जांबाज हर पल हाजिर हैं।
सामने इनके अगर कोई दुश्मन आयेगा तो वह खाक में ही मिटेगा। युवा जांबाजों ने कदम से कदम मिलाते हुए अंतिम पग पार किया। अंतिम पग स्वागत करता है उन वीर जवानों का जहां सर्वोच्च बलिदान ही जीवन का सार होता है।
इस दौरान आर्मी एवियेशन कोर के तीन हेलीकाप्टरों ने भी आसमान से पुष्प वर्षा कर इन युवा सैन्य अधिकारियों का अभिनंदन किया। इसके बाद निजाम पवेलियन में संपन्न हुई पीपिंग व ओथ सेरेमनी के दौरान युवा अफसरों के जज्बात देखते ही बन बन रहे थे। बतौर लेफ्टिनेंट सेना की विभिन्न रेजिमेंटों/यूनिटों में कमीशंड हो रहे इन युवा सैन्य अधिकारियों ने भी माटी को चूमकर देश की रक्षा के लिए मर-मिटने की शपथ ली।