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चाकदह नाट्यजन

‘हे राम’ में गोडसे की नजर से गांधी पर सवाल, कोलकाता का नाटक क्यों बना चर्चा का केंद्र?

कोलकाता में इन दिनों एक हिंदी नाटक **‘हे राम’** चर्चा के केंद्र में है। शीर्षक भले ही गांधीजी के अंतिम शब्दों की याद दिलाता हो, लेकिन यह नाटक पूरी तरह नाथूराम गोडसे के दृष्टिकोण के इर्द-गिर्द बुना गया है। नाटक का मंचन बंगाल के नदिया जिले की चर्चित नाट्य संस्था **चाकदह नाट्यजन** ने किया है, जो प्रायः…
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