वोट चोर, गद्दी छोड़!
विष्णु नागर
एक दिशा से आवाज़ आई -- 'वोट चोर, गद्दी छोड़।' वोट चोर ने इस कान से सुना, उस कान से निकाल दिया।
फिर दो दिशाओं से आवाज आई, तो भी उसने यही किया। जब तीन दिशाओं से आवाज आने लगी, तो उसने दोनों कानों में रुई ठूंस ली। मगर जब चारों दिशाओं से यही आवाज आने लगी, तो वह कुछ-कुछ घबराया,…
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