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लोकतंत्र

बेवफा कोरोना

पहली बार कोई पवित्र काया, ऊंची गद्दी पर बैठी है। उस पर भी अविश्वास! भाई ये तो घोर कलियुग है। यहां जनता के अवतार पर भी सवाल-दर-सवाल, मेरा तो दिल बैठा जा रहा है। कैसे बेवफा लोग हैं? वे कोरोना पर भी शक कर रहे हैं। कह रहे हैं ये वायरस नहीं है महज सियासत है। लो कल्ल लो बात!... मैं चिल्ला कर कह रहा…
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पार्टनर क्या पाॅलिटिक्स है!

राम-राम, क्या कलियुग आ गया है। जहां लोकप्रिय राजा पर भी जनता विश्वास करने को तैयार नहीं। ये कांग्रेसी टाइप लोग जनता को भ्रमित करते हैं। कितनी गंदी पाॅलिटिक्स है। आइए! समवेत स्वर में इनकी निंदा करते हैं जय श्री राम-जय श्री राम!
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लोकतंत्र ‘शोर’ के कंधों पर!

इन दिनों संसद से सड़क तक ध्वनि मत का मुद्दा ही जेर-ए-बहस है। हुआ यह कि राज्यसभा यानी सयाने सांसदों के सदन में ध्वनि का ही राष्ट्रीय पंगा हो गया। मनुहार के लिए किसानों को तरह-तरह के लुभावने पैकेज दिये जा रहे हैं। इस साल की एमएसपी महीनों पहले ही बढ़े दामों में घोषित हो गयी। लेकिन हंगामा बरपा है...…
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