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आलेख

ट्रम्प से इतना भय क्यों खा रहे हो, क्या डर है जो छुपा रहे हो?

 बादल सरोज बहुतई विचित्र समय है। उधर माय डिअर फ्रेंड ऐसा पिलकर पीछे पड़ा हुआ है कि चुप्प होने का नाम ही नहीं ले रहा और इधर उनके प्यारे मित्र मोदी ऐसी चुप्प साधे हैं कि बोल ही नहीं फूट रहा ; न हाँ कहते बन रहा है, न ना कहने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच हुई लड़ाई – जिसमें…
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हनीमून : एकला चोलो रे !

प्रकाश सहाय, वरिष्ठ पत्रकार घोर कलियुग में शहद और चांद के साथ राहु केतु मंगल शनि सब के सब नीच राशि में योग बना कर धमा चौकड़ी मचाने लगे हैं... नक्षत्र गोचर एकदम हाहाकारी बन गए हैं...मधुमास में श्राद्ध मास तीसरे भाव में चुपके से प्रवेश कर गया है ...असर दिखने लगा है .. हनी ललका छोटका मिर्चाई जैसा…
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आतंकवाद, युद्ध और हिंदुत्वपरस्त राष्ट्रवाद

 जवरीमल्ल पारख ‘पुलवामा के बाद बालाकोट पर हुई ज्यादा बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक ने भी आतंकवादी हमलों पर रोक नहीं लगायी बल्कि उरी और पुलवामा से बड़ा हमला कश्मीर के पहलगाम में हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि सर्जिकल स्ट्राइक का मक़सद आतंकवादी हमलों को रोकना नहीं है बल्कि हमला करने वालों को सज़ा देना है। यानी…
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 न घर-घर सिंदूर, न हर-हर मोदी!

राजेंद्र शर्मा इन विरोधियों को क्या कहें, बताइए खामखां में अच्छे-भले ‘‘घर-घर सिंदूर’’ प्रोग्राम में ही भांजी मार दी। घर-घर सिंदूर को लेकर ऐसी हाय-हाय मचायी, ऐसी हाय-हाय मचायी कि मोदी पार्टी को प्रोग्राम ही छोड़ना पड़ गया। प्रोग्राम छोड़ने तक बात रहती, तो फिर भी गनीमत थी। बेचारों को अपने ही…
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लो बाजार में आ गया राजनाथ आम!

डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट भले खास न हो पर आम है वह फलों का राजा सरेआम है वह दशहरी,लंगड़ा चौसा,कही देशी मलीहाबादी कही लंगड़ा परदेशी चूसकर खाने का मज़ा निराला शहद सा मीठा खट्टा मतवाला कही डाल का, कही पाल का कही पेटियों में सजता है राजा अमीर-गरीब हर कोई खाता बजट में आम सबके आ जाता सौगात…
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ऑपरेशन कगार या मिशन कॉरपोरेट?

बादल सरोज ऑपरेशन कगार वास्तव में अडानी और कार्पोरेट्स के लिए रेड कारपेट बिछाने का मिशन है। इसी 21 मई को बस्तर के नारायणपुर के माड़ इलाके के गुंडेकोट जंगल में हुई मुठभेड़ में सशस्त्र बलों ने माओवादियों के शीर्षस्थ नेतृत्व को मार डाला। स्वयं माओवादियों की ओर से जारी की गयी प्रेस विज्ञप्ति के…
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शांति की बात अब विद्रोह है : युद्धोन्मादी राष्ट्रवाद का मनोविज्ञान

डॉ. विक्रम सिंह पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट दिखाई दिया. यह किसी भी देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि वह एकता के साथ आतंक के खिलाफ लड़ने को तैयार है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इसके साथ एक अजीब सा युद्ध उन्माद भी देखने को मिला। यह बात दो घटनाओं…
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आतंकवाद विरोधी राष्ट्रीय सर्वानुमति कौन तोड़ रहा है?

राजेंद्र शर्मा पहलगाम की दरिंदगी और उसके बाद के घटनाक्रम पर, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है, राष्ट्रीय सर्वानुमति की मियाद पूरी हो गयी लगती है। और यह विपक्ष के बावजूद और मुख्य रूप से सत्ताधारी संघ-भाजपा की, इस घटनाक्रम से उठी देश की चिंताओं व भावनाओं को, अपने राजनीतिक/चुनावी लाभ के लिए…
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और अब मामला शर्मिष्ठा पनोली का : लोकतंत्र वाकई खतरे में है!

संजय पराते लगता है हमारी सरकार और न्यायपालिका के लिए सांप्रदायिकता, वैमनस्यता और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के पैमाने अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग है। सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेताओं के लिए अलग और बाकी विपक्षियों और आम जनता के लिए अलग। अब डॉ. अली खान मेहमूदाबाद के बाद शर्मिष्ठा पनोली का नया…
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निशाने पर सिर्फ मूर्ति भर नहीं है!

बादल सरोज मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के परिसर में डॉ. बी आर अम्बेडकर की मूर्ति लगाने के सवाल पर हो रहे विरोध को सिर्फ स्वयं को वकील बताने वाले चंद कुंदबुद्धि, जातिवादी, लम्पट और स्तरहीन व्यक्तियों की खुराफात समझना गलत समझदारी होगी। निशाने पर सिर्फ मूर्ति भर नहीं है, निशाने पर सिर्फ बाबा…
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