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आलेख

नेशनल पीएच.डी. स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद कन्फर्म हो रिसर्च डिग्री

डॉ. सुशील उपाध्याय बीते एक साल में यूजीसी ने एक दर्जन से अधिक प्राइवेट विश्वविद्यालयों पर पीएच.डी. डिग्री ऑफर करने पर रोक लगाई है। अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि कई प्राइवेट विश्वविद्यालयों में चार से छह लाख में डिग्री बेची जा रही हैं। किसी भी विषय या डोमेन की डिग्री एक-डेढ़ लाख में लिखवाकर दी…
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एक चुटकी सिन्दूर की कीमत तुम क्या जानो नरेन बाबू!

 बादल सरोज अंततः खुद उन्हीं ने इसका प्रमाण भी प्रस्तुत कर दिया है कि वे सचमुच में नॉन-बायोलॉजिकल हैं, अपौरुषेय हैं। सबसे पहली बार उन्होंने चौबीस के लोकसभा चुनाव के पहले चराचर मनुष्य जगत के समक्ष यह रहस्य उदघाटित किया था कि वे सामान्य प्राणियों की भांति जन्मे नहीं है, बल्कि स्वयं परमात्मा…
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पानी, आतंक और कश्मीर: पाकिस्तान की बैकफुट रणनीति बनाम भारत का अडिग रुख

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार सिंधु जल समझौते के निलंबन और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के कड़े जवाब से दबाव में आए पाकिस्तान ने अब बातचीत की पेशकश करके वैश्विक मंच पर अपनी छवि को बचाने की कोशिश शुरू कर दी है। लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के…
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भारत में कृषि संकट और खेत मज़दूरों की बदलती प्रकृति

विक्रम सिंह महाराष्ट्र के नांदेड जिले की मुखेड तालुका के अंबुलगा गाँव के खेत मज़दूर माणिक घोंसटेवाड को साल के कुछ महीनों में ही खेतों में काम मिलता है। उनको जून-जुलाई में सोयाबीन या कपास की बुआई, अगस्त-सितंबर में निराई (हाथ से या कीटनाशकों से), और दिसंबर-जनवरी में कटाई के दौरान ही रोज़गार…
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इतने तनहा तो हम कभी भी न थे!

बादल सरोज 1948 की बात है: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बना संयुक्त राष्ट्रसंघ अभी ताजा-ताजा ही था। कश्मीर के सवाल को लेकर एक ऐसा प्रस्ताव लाया गया, जो इसके भारत में विलय की असलियत को झुठलाने वाला और इस तरह भारत के खिलाफ था। तबके समाजवादी सोवियत संघ ने उसे ‘वीटो’ कर दिया। 1971: बांग्ला देश का…
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आतंकवाद के खिलाफ एकता और भाजपा का पाखंड

राजेंद्र शर्मा विदेश सेवा के अधिकारियों के मुकाबले, इन सांसदों/ राजनीतिक नेताओं का वजन विदेशी मोर्चे पर भी इसीलिए अधिक माना जा रहा है कि वे अपनी राजनीतिक पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारतीय जनता की राय का प्रतिनिधित्व करती हैं। लेेकिन, सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की आंतरिक…
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आमिर पठान के लिए दो मिनट का मौन!

सुभाष गाताडे लातूर सूबा महाराष्ट्र के मराठवाडा इलाके का शहर है, जो अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर है। इसकी जिन्दगी अब बदस्तूर सामान्य हो गयी होगी। बमुश्किल दो सप्ताह पहले शहर के एक हिस्से में कुछ अधिक सरगर्मी थी, जिसकी फौरी वजह एक टेलिकाॅम कम्पनी के एक वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी द्वारा…
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ऑपरेशन सिंदूर की क़ीमत तुम क्या जानो विपक्षी बाबू!

राजेंद्र शर्मा ये विपक्ष वाले जब राष्ट्रभक्ति ही नहीं समझते हैं, तो ऑपरेशन सिंदूर की कीमत क्या जानेंगे? वर्ना ऑपरेशन सिंदूर में अपने अर्णव गोस्वामियों, गौरव सामंतों, नाविका कुमारों, अंजना ओम कश्यपों, अशोक श्रीवास्तवों आदि, आदि के वीरतापूर्ण कारनामों के गुण गा रहे होते या नहीं! पर खुद गुण…
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संथारा : 3 साल की बच्ची की मौत लंबे समय तक क्यों सालती रहेगी?

सुभाष गाताडे, अनुवाद : संजय पराते "मनुष्य कभी भी बुराई का खुशी से पालन नहीं करता, जब तक कि वह धार्मिक विश्वास से प्रेरित न हो।" - ब्लेज़ पास्कल (1623–1662), फ्रांसीसी गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी, आविष्कारक, दार्शनिक और कैथोलिक लेखक। इंदौर के आईटी प्रोफेशनल की तीन वर्षीया बेटी नम्रता (बदला हुआ…
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चौंकाने और  डराने वाला सप्ताह!, इधर सूरज पाले का शोर, उधर अंधेरा पसरता चहुं ओर

बादल सरोज मई का दूसरा सप्ताह देश और समूचे भारतीय प्रायद्वीप के लिए जैसा था, वैसा कभी नहीं रहा। तीन दिन चला भारत-पाकिस्तान युद्ध – या वह जो भी था -क्यों था, क्या था, कैसे शुरू हुआ, कब खत्म हुआ, किसने कितना पाया, कितना खोया और गंवाया, दोनों तरफ के मोर्चों पर क्या घटा, सेना, जनता और राजनीतिक…
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