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आलेख

धर्मस्थला में दबे सत्य और न्याय को उजागर करना जरूरी

(आलेख : के एस विमला, अनुवादक : संजय पराते) हरे-भरे जंगलों और धीमी-धीमी बहती जलधाराओं से घिरा, और चूंकि यह बरसात का मौसम है — बहते पानी का तेज़ खिंचाव, बारिश की पुकार करते मोर और तोतों की चहचहाहट ; यह एक ऐसी जगह है, जो मन को प्रसन्न करती है। लेकिन यहाँ दुःख भारी है और मन पर सन्नाटा छाया हुआ है।…
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वोट चोर, गद्दी छोड़!

विष्णु नागर एक दिशा से आवाज़ आई -- 'वोट चोर, गद्दी छोड़।' वोट चोर ने इस कान से सुना, उस कान से निकाल दिया। फिर दो दिशाओं से आवाज आई, तो भी उसने यही किया। जब तीन दिशाओं से आवाज आने लगी, तो उसने दोनों कानों में रुई ठूंस ली। मगर जब चारों दिशाओं से यही आवाज आने लगी, तो वह कुछ-कुछ घबराया,…
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गिरफ्तार मंत्रियों को हटाने का विधेयक भ्रष्टाचार पर नहीं, विपक्ष पर हमला है

(आलेख : एम ए बेबी, अनुवाद : संजय पराते) "जनहित, कल्याण और सुशासन" के नाम पर पेश किया गया 130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 वास्तव में विपक्ष के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को अस्थिर करने और भारत के संघीय ढांचे को कमजोर करने के लिए बनाया जा रहा एक कठोर कानून है। बदले की राजनीति के दौर में, जहाँ…
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लालकिले से प्रधानमंत्री का वेश धर बोले ‘स्वयंसेवक’ का विभाजनकारी उद्घोष

(आलेख : बादल सरोज) स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से दिए जाने वाले परंपरागत भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2025 की 15 अगस्त का भाषण अब तक के हुए, खुद उनके भाषणों सहित, सभी भाषणों की तुलना में निराशाजनक ही नहीं, चिन्ताजनक भी था । आजादी के बाद से ही देश की जनता 15 अगस्त को दिए…
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देशभक्ति का नया नाप : 56 इंच से आगे, पेट, जेब और पोस्टर

व्यंग्य : मज़्कूर आलम देश में ऐसे ऐतिहासिक क्षण बार-बार नहीं आते, जब लाल किले के प्राचीर से भाषण सिर्फ़ अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति या विकास योजनाओं पर न होकर, सीधे आपकी कमर, पेट और जेब की परिधि पर वार करे। इस वर्ष (2025) का स्वतंत्रता दिवस इसी श्रेणी में रखा जायेगा — प्रधानमंत्री ने मोटापे को राष्ट्रीय…
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भाजपायी चुनाव आयोग

(आलेख : राजेंद्र शर्मा) सोशल मीडिया में पिछले कुछ हफ्तों से एक मजाक चल रहा था। चुनाव आयोग ने इसका जोरदार तरीके से खंडन किया है कि उसने भाजपा में विलय कर लिया है ; आयोग ने कहा है कि वह भाजपा सरकार का बाहर से ही समर्थन करता रहेगा! मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार की पहली खुली प्रेस कान्फ्रेंस…
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असत्य का पुजारी

 विष्णु नागर राजा हरिश्चंद्र से लेकर महात्मा गांधी तक सत्य के प्रति गहरी निष्ठा रखने वाले कम नहीं हुए हैं, मगर असत्य के प्रति गहरी निष्ठा रखने वाला भारत में आज तक अकेला केवल एक ही हुआ है। उसे आप भी जानते हैं और वह भी जानता है‌ कि आप उसे जानते हैं। वही जिसने स्वतंत्रता दिवस पर अपने ही भाषण का…
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मालेगांव बम विस्फोट : भगवा उग्रवादियों की ‘मासूमियत’

(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते) 2000 के दशक की शुरुआत में मुस्लिमों को निशाना बनाकर किए गए कई बम विस्फोटों ने देश को हिलाकर रख दिया था। ये थे मालेगांव (2006, 2008), समझौता एक्सप्रेस (2007), हैदराबाद की मक्का मस्जिद (2007), अजमेर शरीफ दरगाह (2007) और मोडासा (2008)। इससे पहले, सार्वजनिक स्थानों…
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थेथरई अनलिमिटेड

आलेख : बादल सरोज जिस समयकाल से हम सब गुजर रहे हैं, हुकुम तो इसे अमृतकाल कहे जाने का है। कुछ दिलजले इसे त्रासद प्रहसन का समय कहते हैं, तो कुछ इसे दिलचस्प समय – इंट्रेस्टिंग टाइम – करार देते हैं। कईयों के मुताबिक़ यह विडम्बना का काल है, तो ज्यादातर के मुताबिक़ इसे अँधेरे की ओर मुसलसल फिसलन के दौर…
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