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आलेख

क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

राजेंद्र शर्मा बेशक, यह कहना तो शायद बहुत जल्दबाजी होगी कि बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण या एसआइआर की घोषणा के बाद से विपक्षी पार्टियों ही नहीं, बल्कि सामाजिक व जनतांत्रिक अधिकार संगठनों द्वारा भी ''वोट की चोरी'' के जरिए चुनाव में हेरा-फेरी की जो आशंकाएं जतायी जा रही थीं और जनता के बीच जाकर…
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राष्ट्रीय धुलाई सप्ताह

 विष्णु नागर शुभ अवसर था। सामने वाला 'मेरी मां को गाली दी' के नाम पर दूसरों को पटक-पटक कर धोना चाहता था, मगर वक्त-वक्त की बात है, पांसा उलटा पड़ गया। वह खुद ही धुल गया और प्रभु की कृपा से इतने प्यार से और इतना ज्यादा धुल गया कि उसके मुंह से जय श्री नहीं, राम-राम निकल गया! हम भारतीयों की यह…
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अब कोई 75 का नहीं होगा, क्योंकि बड़े वालों ने ठोककर किया बड़ा होने से इनकार!

बादल सरोज जिन्हें सितम्बर महीने में एक ही सप्ताह के भीतर दो-दो विदाई समारोह की फुलझड़ियों और उनकी जगह आने वालों के स्वागत में आतिशबाजी की गलतफहमियाँ थी, उनकी सारी उम्मीदों पर घड़ा भर ठण्डा पानी उड़ेलते हुए 75 वर्ष में रिटायरमेंट की योजना को सिरा दिया गया है। बात वहीँ से ख़त्म हुई, जहां से शुरू…
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आरएसएस : दोरंगी चाल के सौ साल

 राजेंद्र शर्मा आरएसएस के सरसंघचालक, मोहन भागवत ने हाल के दिल्ली के अपने तीन दिन के व्याख्यान के आखिरी दिन, सवालों के जवाब के बहाने से मथुरा और काशी के मंदिर-मस्जिद विवाद के सिलसिले में जो कुछ कहा, संघ की दोरंगी चाल का शास्त्रीय उदाहरण है याद दिला दें कि अयोध्या मामले में अदालती फैसले के…
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सबसे बड़ा गुरु तो स्वयं परमात्मा शिव है,जो हमे हर रोज़ पढ़ाते है

डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एक ऐसी अनूठी आध्यात्म ज्ञान और चरित्र निर्माण की  शिक्षण संस्था  है जहां प्रतिदिन स्वयंं परमात्मा ही पढ़ाते है।जो पाठ प्रतिदिन ब्रह्माकुमारीज के 140 देशों में फैले साढ़े आठ हजार सेवा केंद्रों पर परमात्म निमित्त भाई बहनों…
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अब समय आ गया है कि अमेरिका का अधीनस्थ सहयोगी बनना बंद करे भारत

प्रकाश करात, अनुवाद : संजय पराते यह विडंबना ही है कि भारत की विदेश नीति में लंबे समय से लंबित सुधार करने के लिए मोदी सरकार को मजबूर करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प को धन्यवाद देना पड़ेगा। वाजपेयी सरकार से लेकर मनमोहन सिंह सरकार तक और फिर मोदी सरकार के दौरान तेज़ गति से लगभग तीन दशकों तक,…
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क्या भारत का लोकतंत्र अब ‘नियंत्रित लोकतंत्र’ में बदल गया है?

(आलेख : कृष्ण प्रताप सिंह) अंदेशे तो पहले से जताए जा रहे थे, लेकिन अब देश के चुनाव आयोग ने जिस तरह सारी लोकलाज (जिसे लोकतांत्रिक बर्ताव का सबसे जरूरी तत्व बताया जाता है) बिसराकर अपनी (अ)विश्वसनीयता से जुड़े सारे सवालों की जवाबदेही की ओर पीठ कर ली, साथ ही चोर के कोतवाल को डांटने की तर्ज पर विपक्षी…
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जस्टिस रेड्डी : संवैधानिक नैतिकता और हाशिये की आवाज़ों के रक्षक

 एम श्रीधर आचार्युलु इंडिया गठबंधन द्वारा उपराष्ट्रपति पद के लिए जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाने का निर्णय न केवल सराहनीय है, बल्कि मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़ा होने का प्रतीक भी है। वे भले ही सुप्रीम कोर्ट की बेंच से सबसे चर्चित…
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अज्ञान के अंधकार के अनन्य अनुरागी

बादल सरोज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हिमाचल प्रदेश के ऊना में जवाहर नवोदय विद्यालय स्कूल के बच्चों से बात करने गए भाजपा सांसद, पूर्व मंत्री अनुराग ठाकुर ने उनका भाषण सुनने के लिए जमा हुए बच्चों से एक सवाल पूछा कि अंतरिक्ष में यात्रा करने वाला पहला व्यक्ति कौन था? सारे बच्चों ने एक स्वर में जोर से…
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किश्तों में संविधान बदलने का खेल

राजेंद्र शर्मा संसद के मानसून सत्र की अपेक्षाकृत छोटी अवधि के दौरान ही, अनेक राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, जहां देश के मूड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, वहीं इसी दौरान देश को दो बड़े सरप्राइज भी देखने को मिले हैं। देश के मूड में बदलाव का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि संसद…
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