देहरादून। दून विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में शिक्षा और प्रशिक्षण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट के नेशनल काउंसिल सदस्य **प्रदीप कुमार माधवन** ने कहा कि शिक्षण संस्थान बुद्धिमत्ता सृजन के उत्कृष्ट केंद्र होते हैं। शिक्षा के माध्यम से ही एक सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण संभव है।
उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और न ही इसके लिए हमेशा औपचारिक ढांचे की आवश्यकता होती है। व्यक्ति अपने दैनिक जीवन, सामाजिक व्यवहार और परिवेश से भी बहुत कुछ सीखता है। कई बार यही अनौपचारिक शिक्षा जीवन को सफलता की दिशा में अग्रसर करती है।
कार्यक्रम में कुलपति **सुरेखा डंगवाल** ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा केवल व्याख्यान कक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली सतत प्रक्रिया है। मनुष्य अपने अनुभवों से निरंतर सीखता है और इन्हीं अनुभवों के आधार पर वह एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
कार्यशाला में अतिथियों का स्वागत करते हुए आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. एचसी पुरोहित ने कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार और सृजनात्मक विकास को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता है।
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संकाय अध्यक्ष प्रो. आरपी ममगाईं ने कहा कि उम्र के साथ परिपक्वता और अनुभव दोनों बढ़ते हैं, और कार्यशालाएं इस सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाती हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई प्राध्यापक और शोधार्थी उपस्थित रहे।