पटना, बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्णिया से सांसद और चर्चित नेता पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी करीब 31 साल पुराने एक मामले में की गई है। पटना पुलिस ने उन्हें मंदिरी स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और टीम का नेतृत्व एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह तथा एसएसपी कार्तिकेय शर्मा कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि पप्पू यादव दिल्ली से पटना लौटे ही थे कि आधी रात को पुलिस उनके घर पहुंच गई। पांच थानों की पुलिस टीम ने गिरफ्तारी वारंट दिखाते हुए उन्हें हिरासत में लिया। हालांकि पप्पू यादव ने शुरुआत में गिरफ्तारी का विरोध किया और कहा कि वे शनिवार सुबह स्वयं अदालत में पेश होने को तैयार हैं। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई और नारेबाजी देखने को मिली।
गिरफ्तारी से पहले मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि हाल के दिनों में उन्होंने पटना में नीट छात्रा की मौत और गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े मामलों पर सरकार को घेरा था, जिससे नाराज होकर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वे बीमार हैं और उन्हें आशंका है कि उनके साथ कुछ अनहोनी हो सकती है। पप्पू यादव ने पुलिस से अनुरोध किया कि उन्हें थाने नहीं, सीधे कोर्ट ले जाया जाए।
जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 1995 का है और पटना के गर्दनीबाग थाने में अपराध संख्या 552/1995 के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता मकान मालिक विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि पप्पू यादव ने निजी उपयोग के नाम पर मकान किराये पर लिया, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया। जब इसकी जानकारी मकान मालिक को हुई तो विवाद बढ़ गया।
इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, घर में अवैध प्रवेश, आपराधिक धमकी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी (अब बीएनएस की समकक्ष धाराएं) के तहत यह केस चल रहा था। फिलहाल पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।