574 शिविर, लाखों लोग और हजारों समाधान: कैसे बदला ‘जन-जन की सरकार’ ने उत्तराखंड का प्रशासन

देहरादून।मुख्यमंत्री **पुष्कर सिंह धामी** के नेतृत्व में संचालित *‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’* कार्यक्रम उत्तराखंड में जनसुनवाई, पारदर्शिता और त्वरित समाधान का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से शासन व्यवस्था को आम नागरिकों के और अधिक करीब लाया गया है, जिससे समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के सभी **13 जनपदों** में व्यापक स्तर पर बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। **06 फरवरी 2026** तक राज्यभर में कुल **574 कैंप** लगाए जा चुके हैं, जिनमें से **12 कैंप अकेले आज** आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से अब तक **4 लाख 55 हजार 790 नागरिकों** ने प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी की है, जबकि आज के शिविरों में ही **13 हजार 489 लोगों** ने अपनी समस्याएं, शिकायतें एवं आवेदन प्रस्तुत किए।

आंकड़े बताते हैं कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक जनसंपर्क नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान का माध्यम बन चुका है। अब तक इस अभियान के तहत कुल **44,602 शिकायतें** दर्ज की गई हैं, जिनमें से **30,089 शिकायतों का सफल निस्तारण** किया जा चुका है। शेष शिकायतों पर भी समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा, *“सरकार की जिम्मेदारी है कि जनता की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर ही किया जाए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ इसी सोच का साकार रूप है।”*

इस कार्यक्रम के माध्यम से राजस्व, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, शिक्षा, कृषि, पंचायतीराज, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभाग एक ही मंच पर आम जनता को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि जनता का शासन पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ आज उत्तराखंड में **समाधान के साथ शासन** की पहचान बन चुका है और सुशासन की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।

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