नई दिल्ली |
केंद्रीय बजट में केरल की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए केरल के विपक्षी सांसदों ने सोमवार को संसद भवन के मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बजट को राज्य के प्रति भेदभावपूर्ण करार दिया। प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव एवं सांसद केसी वेणुगोपाल सहित केरल से जुड़े कई विपक्षी सांसद शामिल रहे।
प्रदर्शन कर रहे सांसदों का आरोप था कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट केरल की प्रमुख मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि राज्य को बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण योजनाओं और वित्तीय सहायता के मामले में अपेक्षित आवंटन नहीं दिया गया। सांसदों का कहना था कि बजट में नीति निर्धारण और संसाधन आवंटन के स्तर पर केरल के साथ अन्याय हुआ है।
विपक्षी सांसदों ने इस बजट को “केरल विरोधी बजट” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप था कि दक्षिण भारतीय राज्यों को केंद्रीय योजनाओं और आर्थिक सहयोग के मामले में पीछे रखा जा रहा है, जबकि ये राज्य राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इस मुद्दे पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट पेश करते समय यह तथ्य जानबूझकर नजरअंदाज किया गया कि केरल भी भारत के नक्शे का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के साथ इस तरह का रवैया संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बजट को लेकर केरल में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष का यह प्रदर्शन न केवल बजट पर नाराजगी को दर्शाता है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव की ओर भी इशारा करता है।
सांसदों ने मांग की कि केंद्र सरकार केरल की वित्तीय स्थिति, विकासात्मक जरूरतों और सामाजिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए बजट आवंटन की पुनर्समीक्षा करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो विरोध और तेज किया जाएगा।