इंफाल।
शनिवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल की सड़कों पर मेइतेई जनता का हुंकार गूंज उठा। **कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटेग्रिटी (कोकोमी)** ने ‘**मणिपुर कन्बा खोंग्चट**’ यानी **मणिपुर बचाओ मार्च** आयोजित कर राज्य के विभाजन की किसी भी कोशिश का विरोध किया। रैली में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और हाथों में तख्तियां-बैनर लेकर जोरदार नारे लगाए।
रैली सुबह 10 बजे **क्वाकेथेल टिड्डिम ग्राउंड** से शुरू होकर टिड्डिम रोड, केशमपत जंक्शन, वाहेंग लेईकाई रोड, नगामापल रोड, खुयाथोंग और थांगमेइबंद रोड से होते हुए **थांगमेइबंद थाउ ग्राउंड** पर समाप्त हुई। स्थानीय लोगों ने सामान्य कार्य स्थगित कर रैली में भाग लिया, जिससे बाजार और दुकानें लगभग बंद रही।
मणिपुर पिछले ढाई वर्षों से जातीय हिंसा की चपेट में है। **3 मई 2023** से चल रहे **मेइतेई-कुकी संघर्ष** में अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 60,000 से अधिक परिवार बेघर हुए हैं। फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद **राष्ट्रपति शासन** लागू किया गया था। केंद्र सरकार ने मार्च तक 40,000 विस्थापितों के पुनर्वास का वादा किया, लेकिन स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
कोकोमी का कहना है कि कुछ ताकतें मणिपुर को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। कुकी संगठनों की **अलग प्रशासन की मांग, नार्को-टेररिज्म के आरोप** और सीमा पार से घुसपैठ जैसे मुद्दे बार-बार उठते रहे हैं। संयोजक **वाईके धीरेन** ने बताया कि यह रैली **लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज़** केंद्र तक पहुंचाने का मंच है।
रैली में महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी संख्या शामिल रही। कई लोगों ने भावुक होकर कहा– “हमारा मणिपुर बचाओ, हम अलग नहीं होने देंगे।” सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, और **सीआरपीएफ** की टुकड़ियां पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहीं, लेकिन माहौल में तनाव बना रहा।