हरियाणा-पंजाब में डिजिटल मिशन फेल? सरकारी रिपोर्ट ने खड़े किए बड़े सवाल

नज़रिया | धर्मपाल धनखड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में शुरू किया गया **डिजिटल इंडिया मिशन** देश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की एक दूरदर्शी पहल थी। बीते एक दशक में सरकारी योजनाओं, सेवाओं और सुविधाओं को ऑनलाइन कर आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। शुरुआती असुविधाओं के बावजूद शहरी क्षेत्रों में इस अभियान के सकारात्मक और प्रभावी परिणाम सामने आए।

लेकिन सवाल यह है कि क्या डिजिटल इंडिया की यह सफलता गांवों तक समान रूप से पहुंच पाई है? क्योंकि भारत की आत्मा आज भी गांवों में ही बसती है और देश की वास्तविक प्रगति का रास्ता वहीं से होकर गुजरता है।

सरकारी योजनाओं, पेंशन, प्रमाण पत्र, किसान सेवाओं और विभिन्न लाभकारी कार्यक्रमों के लिए आज ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य हो चुका है। शहरों में जहां कंप्यूटर और इंटरनेट आम हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। पंचायतों में कंप्यूटर और डिजिटल सुविधाएं न हों, तो ग्रामीणों के लिए डिजिटल सेवाएं केवल कागज़ी दावा बनकर रह जाती हैं।

**केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय** की रिपोर्ट *“पंचायती राज संस्थानों के बुनियादी आंकड़े-2025”* इस सच्चाई को उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार देश की **56 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में अब तक कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं**। कुल 2.63 लाख पंचायतों में से करीब 2.07 लाख में ही कंप्यूटर पहुंच पाए हैं। डेढ़ दशक बाद भी यह आंकड़ा डिजिटल मिशन की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि **पंजाब और हरियाणा जैसे संपन्न राज्यों** की स्थिति बेहद कमजोर है। पंजाब में मात्र 2 फीसदी और हरियाणा में केवल 10 फीसदी ग्राम पंचायतों के पास ही कंप्यूटर उपलब्ध हैं। इसके उलट बिहार जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े राज्य में 25 फीसदी पंचायतें डिजिटल सुविधाओं से लैस हैं।

हरियाणा और पंजाब में लगभग सभी सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हैं—यहां तक कि किसान भी फसल पंजीकरण पोर्टल के बिना एमएसपी पर फसल नहीं बेच सकते। ऐसे में पंचायतों में कंप्यूटर की कमी भयावह स्थिति को दर्शाती है।

यह सवाल भी जरूरी है कि जब मैदानी, संपन्न और बेहतर आधारभूत ढांचे वाले राज्यों में यह हाल है, तो उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम पहाड़ी राज्यों में डिजिटल इंडिया की स्थिति क्या होगी?
डिजिटल मिशन की यह धीमी रफ्तार गहन समीक्षा, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की मांग करती है।

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