जिलाधिकारी ने ग्राम और ब्लॉक पंचायतों को सक्रिय कर वनाग्नि नियंत्रण में बढ़ाया जन सहभागिता का दायरा

देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में **जनपद स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समिति की बैठक** आयोजित की गई। बैठक में फायर सीजन के दौरान वनाग्नि घटनाओं की समीक्षा करते हुए प्रभावी रोकथाम और नियंत्रण के लिए **महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी** किए गए। जिलाधिकारी ने मौके पर ही **45 लाख रुपये की उपकरण खरीद** को स्वीकृति दी, ताकि वनाग्नि पर त्वरित और सटीक नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

डीएम बंसल ने कहा कि वनाग्नि रोकथाम में **वन पंचायतों और स्थानीय समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण** है। इसके लिए ग्राम और ब्लॉक पंचायत समितियों को नियमित रूप से सक्रिय रखा जाएगा और उन्हें वनाग्नि नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने **सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम** आयोजित करने, स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देने और स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं व महिला समूहों को इसमें शामिल करने के निर्देश दिए।

वन क्षेत्र में स्थित गुज्जर बस्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता भी जताई गई। इसके अतिरिक्त **हर क्रू-स्टेशन और पटवारी चौकियों को त्वरित प्रतिक्रिया केंद्र** बनाया जाएगा। वनाग्नि से संबंधित सूचना त्वरित आदान-प्रदान हेतु **वायरलेस संचार व्यवस्था और आपदा कंट्रोल रूम** 24×7 सक्रिय रखे जाएंगे।

जनपद में कुल **2,25,853 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र** हैं, जिनमें साल, चीड़, देवदार, बांज और स्प्रूस शामिल हैं। पांच वन प्रभाग—कालसी, चकराता, मसूरी, राजाजी टाइगर रिजर्व और देहरादून—में कालसी और मसूरी सबसे संवेदनशील माने गए हैं। वर्तमान में **127 क्रू-स्टेशन** स्थापित किए जा चुके हैं।

जिलाधिकारी ने जनता से अपील की कि वे वन संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। साथ ही, वनाग्नि रोकथाम में सहयोग करने वाले पंचायतों और व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

इस पहल से देहरादून में **वनाग्नि नियंत्रण प्रणाली को मजबूत और समुदाय आधारित** बनाया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

 

 

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