देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन और जनसंवाद का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। 15 जनवरी 2026 तक की दैनिक प्रगति रिपोर्ट यह साबित करती है कि सरकार अब फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान कर रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेशभर में अब तक 3.47 लाख से अधिक शिविरों** का आयोजन किया जा चुका है। इनमें से पिछले दिवस तक 3.28 लाख शिविर आयोजित हुए थे, जबकि आज 19 नए शिविर लगाए गए। इन शिविरों के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है। जनसुनवाई के आंकड़े भी इस अभियान की सफलता को दर्शाते हैं। अब तक **2.77 लाख से अधिक नागरिकों** ने शिविरों में भाग लिया है, जिससे सरकार की पहुंच और जनविश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।
जनसमस्याओं के निस्तारण के मामले में भी यह कार्यक्रम बेहद प्रभावी साबित हुआ है। अब तक **22,293 शिकायतें** दर्ज की गई हैं, जिनमें से **1.89 लाख से अधिक शिकायतों** का समाधान किया जा चुका है। केवल आज ही 807 शिकायतों का निस्तारण किया गया, जो सरकार की त्वरित कार्यप्रणाली और जवाबदेही को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को मौके पर ही प्रमाण पत्र और सरकारी लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। अब तक **38,255 लोगों** को विभिन्न प्रमाण पत्र एवं सेवाओं का लाभ मिला है। इसके साथ ही राज्य सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों की संख्या बढ़कर **1,51,565** तक पहुंच गई है, जो समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अभियान केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जनता की समस्याओं का समाधान ही सुशासन की असली पहचान है।
प्रदेशभर से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ कार्यक्रम आने वाले समय में उत्तराखंड के सुशासन मॉडल की एक मिसाल बनेगा।