ईरान इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब खुली बगावत का रूप ले चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शिया इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में से एक कोम में भी सरकार विरोधी नारे गूंजने लगे हैं। पांच दशकों में यह पहला मौका है जब खामेनेई शासन के खिलाफ इस स्तर पर खुला विरोध देखने को मिला है।
रविवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। राजधानी तेहरान से उठी यह चिंगारी देखते ही देखते देश के कई हिस्सों में फैल गई। ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, फूलदशहर, कुहदाश्त, दारियुश अंसारी, बख्तियारवंद और अजना जैसे इलाकों में हिंसक झड़पें हुईं। कोम में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद लोग सड़कों पर उतर आए और शासन के खिलाफ नारे लगाए।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब सुरक्षाबलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोलियां चलाईं। कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि कुछ की मौत की पुष्टि की गई है। राजधानी तेहरान, मशहद, इस्फहान, खुज़ेस्तान और लोरेस्तान समेत कई प्रांतों में प्रदर्शन रातभर जारी रहे। कुछ स्थानों पर सरकारी इमारतों, न्यायालयों और बैंकों को नुकसान पहुंचाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोरदेगान और कुहदाश्त में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। फार्स न्यूज एजेंसी ने पुष्टि की है कि कई स्थानों पर भीड़ ने सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया। वहीं मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया है कि दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और कई महिलाओं को तेहरान की एविन जेल में भेजा गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन ने आम लोगों का जीवन असहनीय बना दिया है। यही कारण है कि ईरान एक बार फिर बड़े जनआंदोलन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।