पूर्व IG ने गंवाए 8 करोड़, खुदकुशी को किया मजबूर
मोगा के एक 70 वर्षीय रिटायर्ड क्लर्क भी हुए कंगाल
-बलवंत तक्षक , चंडीगढ़।
पंजाब पुलिस चाहे जो भी दावे करे, लेकिन साइबर ठगों के जाल को तोड़ पाने में अब तक नाकाम रही है। साइबर ठगों ने पुलिस अफसरों के अलावा बैंक कर्मियों, वकीलों और कॉलेज लेक्चरर तक को अपने जाल में फंसाकर उनकी जिंदगी भर की कमाई लूट ली है। ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में फंसे इन लोगों ने न केवल अपनी सारी जमा पूंजी लुटा दी है, बल्कि उम्र के आखिरी पड़ाव में साइबर पुलिस थानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
पूर्व आईजी अमर सिंह ने खुद को मारी गोली
रिटायर आईजी अमर सिंह चहल द्वारा 8 करोड़ 10 लाख रुपए लुटा बैठने का मामला ताजा है। चहल इस ठगी के बाद इतने परेशान हुए कि उन्होंने पटियाला स्थित अपने घर पर खुद को गोली मार ली। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिससे ठगी की पूरी कहानी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन फिलहाल उसके हाथ खाली हैं।
पूर्व आईजी ने एके-47 से अपने सीने में गोली मारी थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उनकी जान बचा ली है, हालांकि उनका एक फेफड़ा पंक्चर हो गया है। चहल ने खुदकुशी की कोशिश से पहले 12 पन्नों का सुसाइड नोट पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के नाम लिखा था। इसमें उन्होंने मानसिक तनाव और ठगी का जिक्र किया है।
विवादास्पद अतीत: यहां यह बता दें कि चहल 2015 में फरीदकोट में हुए बहबल कलां और कोटकपुरा गोलीकांड मामले में आरोपी हैं। फरवरी, 2023 में एडीजीपी एलके यादव की अगुवाई वाली पंजाब पुलिस की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने फरीदकोट अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कई राजनेताओं सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम थे। इनमें चहल का नाम भी शामिल है।
सुसाइड नोट के दर्दनाक खुलासे
चहल ने अपने नोट में लिखा: “सोचा था परिवार को अच्छी जिंदगी दूंगा, लेकिन अब किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहा।“ चहल ने यह भी लिखा है कि उन्होंने सात करोड़ रुपए दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिए थे।
- 1.10 करोड़ रुपए उनके अपने निवेश थे।
- चहल ने लिखा कि अपनी सारी संपत्ति बेचकर भी वह कर्ज नहीं चुका सकते, इसलिए खुदकुशी ही एकमात्र रास्ता बचा है।
- उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ऐसी फर्जी निवेश वेबसाइट्स बंद की जाएं ताकि भविष्य में कोई और इस जाल में न फंसे।
मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खाते कब्जे में
पुलिस ने चहल का मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खाते और दूसरे जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। ख़ुदकुशी नोट के आधार पर ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पटियाला के एसएसपी वरुण शर्मा के मुताबिक चहल के होश में आने के बाद उनके बयान के आधार पर एफआईआर की धाराओं में संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में आरोपियों के असली नाम तुरंत सामने नहीं आते हैं. यह जांच के बाद ही साफ़ हो पाएगा कि ठगी की इस साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे?
पुलिस की तरफ से ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के अलावा टेलीग्राम और व्हाट्सएप में इस्तेमाल नंबरों की जानकारी भी हासिल की जा रही है। इससे पुलिस को साइबर ठगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे पहले चहल ने अपने ख़ुदकुशी नोट में शर्मिंदगी जाहिर की थी कि एक अधिकारी होते हुए भी वे ठगों के जाल में फंस गए। अभी पुलिस को 8. 10 करोड़ रुपए गंवा चुके चहल के पूरी तरह होश में आने का इंतजार है।
क्लर्क से ठगे 42 लाख रुपए
साइबर ठगों ने ‘कस्टम अधिकारी’ बनकर मोगा के एक 70 वर्षीय रिटायर्ड बैंक क्लर्क दर्शन सिंह से 42.25 लाख रुपए लूट लिए। दर्शन सिंह ने बताया कि व्हाट्सएप पर आए एक कॉल की वजह से वे झांसे में आ गए। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से एक पार्सल आया है, जिसमें ड्रग्स, पासपोर्ट और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज पाए गए हैं।
ठगों ने दर्शन सिंह को धमकाया कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिवार के सभी सदस्य विदेश में होने के कारण दर्शन सिंह डर गए और झांसे में आकर 17 अलग-अलग बैंक खातों में कुल 42 लाख 25 हजार रुपए ठगों को ट्रांसफर कर दिए।
दर्शन सिंह को जब पता चला कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं तो मोगा के एसएसपी को लिखित शिकायत दी। ठगी के बाद पीड़ित के पास कुछ नहीं बचा है। साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर जसविंदर सिंह के मुताबिक शिकायत के आधार पर 23 दिसंबर को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है।
