देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो परिचालन संकट से जूझती नजर आ रही है। लगातार तीसरे दिन गुरुवार को एयरलाइन को बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। देश के प्रमुख शहरों में 300 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें या तो रद्द हुईं या फिर लंबी देरी से संचालित हुईं। इस अव्यवस्था के कारण हजारों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार दोपहर तक दिल्ली हवाई अड्डे से इंडिगो की 95, मुंबई से 85, हैदराबाद से 70 और बेंगलुरु से 50 उड़ानें रद्द की गईं। अन्य हवाई अड्डों पर भी बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित हुईं। एयरलाइन के लिए सबसे बड़ी चुनौती नए फ्लाइट-ड्यूटी और रेस्ट-पीरियड नियमों के चलते समय पर पर्याप्त क्रू उपलब्ध कराना बन गया है। लगातार तीन दिनों से क्रू मैनेजमेंट की समस्या गहराती जा रही है।
इस बीच, स्थिति तब और जटिल हो गई जब पायलट एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि एयरलाइंस रेगुलेटरी दबाव बनाने के लिए इस संकट को “कृत्रिम रूप से” बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रही हैं।
इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में स्वीकार किया कि कंपनी अपने यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता परिचालन को सामान्य करने और सेवाओं को समय पर लाने की है, लेकिन यह आसान कार्य नहीं है।
उधर, उड़ान रद्दीकरण और देरी की बढ़ती घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। उनसे पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से इंडिगो की उड़ानों में असामान्य देरी और अंतिम समय में रद्दीकरण की घटनाएं बढ़ी हैं। यात्री लगातार सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी व्यक्त कर रहे हैं। सेवाओं की गिरती गुणवत्ता और बढ़ती शिकायतों को देखते हुए DGCA की सख्ती इस मामले को और गंभीर बनाती है।
इंडिगो पर यह संकट कब तक छंटेगा, यह देखना बाकी है, लेकिन फिलहाल यात्रियों की परेशानियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।