रुड़की में सजी प्रतिभाओं की महफ़िल: शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के भतीजे ने किया राष्ट्र विभूति सम्मान का उद्घाटन
रुड़की। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के भतीजे एडवोकेट किरणजीत सिंह संधू ने कहा कि “प्रतिभाओं का सम्मान न केवल उनके कार्यों की पहचान है, बल्कि यह समाज में नई प्रेरणा और जनहित के प्रति उत्साह को भी जन्म देता है।” वे फोनिक्स यूनिवर्सिटी, रुड़की के सेमिनार हॉल में आयोजित “प्रथम राष्ट्र विभूति सम्मान समारोह–2025” में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
यह कार्यक्रम योगेश शिक्षा कला संस्कृति एवं पर्यावरण उत्थान ट्रस्ट और फोनिक्स यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें देशभर के 150 से अधिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों को उनके विभिन्न क्षेत्रों — कला, शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान, समाजसेवा, उद्यमिता, खेल, पत्रकारिता और ज्योतिष — में असाधारण योगदान के लिए “राष्ट्र विभूति सम्मान” से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम के समन्वयक संजय वत्स तथा विश्वविद्यालय के चेयरमैन इंजी. चैरब जैन, कुलपति प्रो. मनीष पांडेय, डॉ. पंकज मिश्रा (कुलपति, फ्यूचर यूनिवर्सिटी, बरेली), डॉ. प्रिया जाडू, डॉ. बी.एल. यादव, डी.के. शर्मा, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, और डॉ. नवीन खन्ना सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने मंच की शोभा बढ़ाई।
सम्मानित विभूतियों को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र, पगड़ी, हृदय फलक, प्रशस्ति पत्र और समय की सूचक घड़ी भेंट कर अभिनंदित किया गया। इस आयोजन के दौरान सभागार में उपस्थित चार सौ से अधिक विद्वानों और गणमान्यों ने इन विभूतियों के कार्यों की सराहना की और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताया।
समारोह में नन्हें जादूगर निपूर्ण ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि के.के. गर्ग के मधुर बांसुरी वादन ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर डॉ. आकांक्षा रूपा चचरा की पुस्तकों — “जीवन का मूल मंत्र,” “नया सवेरा जीवन चक्र” और “खेल-खेल में हिंदी सीखो” — का लोकार्पण भी हुआ। साथ ही डॉ. शशि देवली ‘शिवी’ की पुस्तक “ब्वारी” का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का संचालन संजय वत्स और डॉ. विजय कुमार त्यागी ने संयुक्त रूप से किया। अंत में राष्ट्रगान और भोजन प्रसाद के साथ समारोह का समापन हुआ।
मुख्य अतिथि किरणजीत सिंह संधू ने कहा, “यह आयोजन भारत की विविधता, संस्कृति और कर्मशीलता का प्रतीक है। जिन विभूतियों को आज सम्मान मिला है, वे देश की वास्तविक प्रेरणास्रोत हैं।”