इस वर्ष दीपावली (Diwali) का पर्व खास खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है। आमतौर पर पांच दिनों तक चलने वाला दीपोत्सव इस बार छह दिनों तक मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत आज धनतेरस (18 नवंबर) से होगी और समापन भाई दूज (23 नवंबर) पर होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार का दीपोत्सव पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और ब्रह्म योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा, जिससे यह पर्व अत्यंत मंगलमय रहेगा।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. सर्वेश्वर शर्मा ने बताया कि इस बार दीप महोत्सव क्रम इस प्रकार रहेगा—
18 नवंबर: धनतेरस,
19 नवंबर: रूप चतुर्दशी,
20 नवंबर: दीपावली,
21 नवंबर: पितृ कार्य अमावस्या,
22 नवंबर: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव,
23 नवंबर: भाई दूज।
पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक मास की त्रयोदशी को समुद्र मंथन से **भगवान धन्वंतरि** अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी कहा जाता है और इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, कुबेर, यमराज और श्री गणेश की पूजा की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पं. चंदन व्यास के अनुसार, धनतेरस पर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और ब्रह्म योग का संगम विशेष फलदायी रहेगा। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन, कुबेर यंत्र, गोमती चक्र और झाड़ू की खरीद शुभ मानी जाती है। झाड़ू को दरिद्रता नाशक और लक्ष्मी आगमन का प्रतीक माना गया है।
इस वर्ष धनतेरस शनिवार को आने से यह शनि प्रदोष व्रत के साथ मनाया जाएगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में विशेष पूजन, रूद्र पाठ और आरती का आयोजन किया जाएगा।
धनतेरस के दिन पूजन के लिए तीन शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—
दोपहर 1:38 से 4:21 बजे तक,
सायं 6 से 7:31 बजे तक,
रात्रि 9 से 12:10 बजे तक।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस बार का दीपोत्सव शुभ योगों और स्थिर लग्नों के कारण समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख देने वाला रहेगा।