उत्तराखंड में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री धामी ने कफ सिरप बिक्री पर कड़ा अभियान शुरू किया
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कफ सिरप की बिक्री और भंडारण पर सख्त अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सख्त निर्देशों के तहत राज्यभर में औषधि विभाग ने एक व्यापक जांच अभियान छेड़ा है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में कोई भी दवा, विशेष रूप से कफ सिरप, बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक न हो।
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सरकारी और निजी सभी मेडिकल स्टोर्स, होलसेल डिपो, फार्मा कंपनियों और बाल चिकित्सालयों तक विस्तारित किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक मेडिकल स्टोर की जांच सुनिश्चित की जाए और किसी भी लापरवाही की स्थिति में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। धामी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड में ऐसा कोई सिरप न बिके, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने। यह हमारी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।”
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश के सभी डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से अपील की कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रतिबंधित सिरप न दिया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सेहत सर्वोपरि है और डॉक्टरों तथा फार्मासिस्टों की जिम्मेदारी है कि वे स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करें।
स्वास्थ्य सचिव एवं FDA आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने भी चेतावनी दी कि बच्चों की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत हर जिले की टीम से प्रतिदिन रिपोर्ट ली जा रही है और दोषियों पर लाइसेंस रद्द सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अपर आयुक्त (FDA) ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि यह अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में जारी रहेगा। राज्यभर में बच्चों के लिए असुरक्षित दवाओं की बिक्री और भंडारण पर लगातार सख्त निगरानी रखी जाएगी।
देहरादून में औषधि विभाग की कार्रवाई
देहरादून शहर में औषधि विभाग ने पलटन बाजार, घंटाघर, ऋषिकेश रोड, जॉलीग्रांट, अजबपुर और नेहरू कॉलोनी में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेताओं की जांच की।
- निरीक्षण के दौरान बच्चों की सर्दी-खांसी की कुछ दवाएँ अलग से भंडारित पाई गईं।
- इन दवाओं को मौके पर सील कर बिक्री पर रोक लगाई गई।
- अधिकांश मेडिकल स्टोर्स ने प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पहले ही बंद कर दी थी।
- कार्रवाई के दौरान एक मेडिकल स्टोर को बंद किया गया और 11 औषधियों के नमूने जांच के लिए लिए गए।
टीम ने विशेष तौर पर SYP. Coldrif, SYP. Respifresh-TR और SYP. Relife जैसी दवाओं का स्टॉक नहीं पाया। औषधि निरीक्षकों विनोद जागुड़ी और निधि रतूड़ी की मौजूदगी में यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
ऋषिकेश में विशेष अभियान
ऋषिकेश क्षेत्र में औषधि निरीक्षक निधि रतूड़ी के नेतृत्व में औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ स्टोर्स में बच्चों की सर्दी-खांसी की दवाएँ अलग से भंडारित थीं।
- टीम ने मौके पर इन दवाओं को सील कर बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।
- कुल 6 औषधियों के नमूने गुणवत्ता जांच हेतु संकलित किए गए।
- अधिकांश मेडिकल स्टोर्स ने शासन के आदेश का पालन करते हुए प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पहले ही रोक दी थी।
हल्द्वानी में सात मेडिकल स्टोर्स की जांच
हल्द्वानी मुखानी क्षेत्र में औषधि विभाग की टीम ने सात मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया।
- इस दौरान दो कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए गए।
- सभी विक्रेताओं को सख्ती से शासन-प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
अल्मोड़ा और बागेश्वर में निरीक्षण
अल्मोड़ा जिले में औषधि विभाग की टीम ने एक मेडिकल स्टोर से कफ सिरप का एक नमूना परीक्षण के लिए लिया।
बागेश्वर जिले के गरुर क्षेत्र में दो मेडिकल स्टोर्स पर निरीक्षण किया गया, जहाँ से दो बाल चिकित्सा सिरप के नमूने गुणवत्ता जांच हेतु संकलित किए गए।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर मेडिकल स्टोर, अस्पताल और फार्मा यूनिट की जांच सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री की अपील
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी डॉक्टरों से कहा कि वे दवा लिखते समय विशेष सतर्कता बरतें, विशेषकर दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित सिरप न लिखें। उन्होंने यह भी कहा कि यह जिम्मेदारी केवल डॉक्टरों की नहीं, बल्कि फार्मासिस्टों की भी है।
स्वास्थ्य सचिव की सख्त चेतावनी
स्वास्थ्य सचिव एवं FDA आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि अभियान के तहत प्रतिदिन रिपोर्ट ली जा रही है।
- लापरवाही पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तीकरण और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- यह अभियान न केवल मेडिकल स्टोर्स और होलसेल डिपो तक सीमित है, बल्कि फार्मा कंपनियों और बाल चिकित्सालयों तक विस्तारित है।
चरणबद्ध अभियान और निगरानी
अपर आयुक्त (FDA) ताजबर सिंह जग्गी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा।
- राज्यभर में बच्चों के लिए असुरक्षित दवाओं की बिक्री और भंडारण पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
- सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर बच्चों को केवल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियाँ ही मिलें।
- अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य से असुरक्षित औषधियों का पूर्ण उन्मूलन नहीं हो जाता।
सरकारी और प्रशासनिक प्रतिबद्धता
उत्तराखंड सरकार ने इस अभियान को राज्य के सुरक्षित स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा घोषित किया है। इसके तहत:
- सभी जिलों में औचक निरीक्षण।
- मेडिकल स्टोर्स और होलसेल डिपो के लाइसेंस की सख्त समीक्षा।
- बाल चिकित्सालयों और फार्मा कंपनियों की निगरानी।
- नमूनों की गुणवत्ता जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
मुख्यमंत्री धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी।
भविष्य की योजना
- प्रदेशभर में दवा सुरक्षा अभियान निरंतर जारी रहेगा।
- प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर सख्त निगरानी।
- शिक्षा और जागरूकता अभियान के माध्यम से फार्मासिस्ट और डॉक्टरों को सतर्क किया जाएगा।
- जनता और अभिभावकों से अपील कि किसी भी संदेहास्पद दवा का सेवन न कराएँ और शिकायतों की रिपोर्ट औषधि विभाग को दें।