श्री बदरीनाथ धाम। उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल में रविवार को सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर श्राद्ध तर्पण किया और पवित्र अलकनंदा नदी में स्नान कर पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी के साथ 7 सितंबर से शुरू हुआ पितृ पक्ष रविवार को समाप्त हो गया।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान अब तक 48 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ धाम में दर्शन किए। जबकि कपाट खुलने के बाद से अभी तक 13,62,278 श्रद्धालु यहां दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने आगे बताया कि सोमवार 22 सितंबर से धाम में शारदीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत होगी। इस दौरान मंदिर परिसर में घट स्थापना की जाएगी और मां दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा-अर्चना संपन्न होगी, जो 2 अक्टूबर महानवमी तक चलेगी।
ब्रह्मकपाल में सर्वपितृ अमावस्या के दिन विशेष चहल-पहल देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने गांधीघाट पर पवित्र स्नान किया और तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में पितृ तर्पण किया। वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित वीरेंद्र हटवाल ने बताया कि इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है। जिनकी मृत्यु तिथि का पता नहीं होता या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश नहीं हो पाता, उनके लिए भी इस दिन विशेष तर्पण किया जाता है। इसे महालय श्राद्ध भी कहा जाता है। मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितर भूलोक से विदा लेकर सद्गति प्राप्त करते हैं।
इस अवसर पर ब्रह्मकपाल में अनेक प्रमुख तीर्थ पुरोहित और पंचायत पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें वीरेंद्र हटवाल, संजय हटवाल, सुधीर हटवाल, अरविंद हटवाल, प्रमोद हटवाल, पंचायत अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, उपाध्यक्ष सुधाकर बाबुलकर, सचिव रजनीश मोतीवाल, कोषाध्यक्ष अशोक टोडरिया, रमेश रैवानी और सुब्रांशु जोशी आदि शामिल थे।