पौड़ी में भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट क्यों बनी चर्चा का विषय?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पौड़ी जनपद के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का भूगर्भीय निरीक्षण किया गया। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय समिति ने 12 से 15 अगस्त तक तहसील पौड़ी और चौबट्टाखाल के कई गांवों का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया।

निरीक्षण समिति ने ग्राम सैंजी, कलगड़ी, बुरांसी, कोटा, क्यार्द, कलूण और रैदुल सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान समिति ने आपदा प्रबंधन विभाग पौड़ी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए क्षति का गहन अध्ययन किया।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन से समिति गठित करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की टीम बनाई गई। समिति में डॉ. अमित गौरव (उप निदेशक/भूवैज्ञानिक), डॉ. कृष्ण सिंह सजवाण (सहायक भूवैज्ञानिक) और रुचि गोदियाल (प्राविधिक सहायक-भूविज्ञान) शामिल थे।

निरीक्षण के दौरान डॉ. अमित गौरव ने बताया कि आपदाओं से सबसे अधिक क्षति तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों, जल स्रोतों, नालों और गदेरों के पास हुई है। इसके अलावा गैप वाली चट्टानों और मोटी मिट्टी की परत वाले स्थानों पर भी भारी नुकसान दर्ज किया गया। इन इलाकों में आवासीय भवन, कृषि भूमि और पहाड़ी ढालों को अतिवृष्टि से गंभीर क्षति पहुंची है।

विशेषज्ञ समिति अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे उत्तराखंड शासन, जिला प्रशासन पौड़ी और आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपा जाएगा। रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, संरक्षा और पुनर्वास संबंधी सुझाव भी शामिल होंगे।

स्थानीय लोगों का मानना है कि भूगर्भीय अध्ययन से भविष्य में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की योजनाएं और सटीक बनाई जा सकेंगी। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान होने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने और ढांचागत सुधार करने में मदद मिलेगी।

 

 

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