प्रो. डीपी सकलानी: NCERT में इतिहास लेखन का नया अध्याय, कैसे हो रहा बदलाव?

धर्मेंद्र प्रधान ने बताई इतिहास की असली आत्मा, जानिए प्रो. सकलानी की खास भूमिका

राष्ट्रीय चरित्र को गौरवान्वित करता एनसीईआरटी – प्रोफेसर डीपी सकलानी के नेतृत्व में इतिहास लेखन का नया दौर

इतिहास किसी भी राष्ट्र की आत्मा और पहचान का दर्पण होता है। यह केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाला आधार भी है। भारत के संदर्भ में लंबे समय तक इतिहास लेखन में भारतीय दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य का अभाव रहा। स्वतंत्रता के बाद भी कई दशकों तक इतिहास के पन्नों में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और वीरों के योगदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लागू होने के बाद इस दिशा में गंभीर प्रयास शुरू हुए। इसके तहत भारतीय शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ प्राचीन ज्ञान परंपरा और भारतीय इतिहास के महत्व को केंद्र में लाने का कार्य किया जा रहा है। इस कड़ी में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) निरंतर कार्यरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास को सही, प्रमाणिक और संतुलित दृष्टिकोण से समझ सके।

हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक राष्ट्रीय चैनल को दिए इंटरव्यू में इतिहास लेखन की महत्ता पर जोर देते हुए इसे “भारत की आत्मा” के समान बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इतिहास का लेखन तथ्यों पर आधारित और संतुलित होना चाहिए, जिसमें भारत की गौरवशाली परंपरा, संघर्ष और योगदान को न्यायपूर्ण स्थान मिले।

वर्तमान में एनसीईआरटी के इतिहास लेखन कार्य का नेतृत्व प्रोफेसर डीपी सकलानी कर रहे हैं। उनके निर्देशन में इतिहास के उन हिस्सों को शामिल किया जा रहा है, जिनका अब तक या तो उल्लेख कम हुआ, या पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। इसमें विशेष रूप से भारत के वीर योद्धाओं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और समाज सुधारकों की गाथाओं को प्रमाणिक साक्ष्यों के साथ जोड़ा जा रहा है।

प्रोफेसर सकलानी का मानना है कि युवाओं को अपने इतिहास से परिचित कराना केवल शिक्षा का उद्देश्य नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। जब युवा अपने पूर्वजों के संघर्ष, त्याग और योगदान को जानेंगे, तब उनमें राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का भाव स्वतः जागृत होगा।

डॉ. दीक्षित ने जताया गर्व
देहरादून स्थित डीएवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. दीक्षित ने बताया कि प्रोफेसर डीपी सकलानी, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में अध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा डीएवी पीजी कॉलेज से पूरी की थी और आज वे एनसीईआरटी में शीर्ष पद पर कार्यरत हैं।

डॉ. दीक्षित ने कहा, “यह हमारे कॉलेज के लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्व छात्र प्रो. सकलानी राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास लेखन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उत्तराखंड का नाम रोशन कर रहे हैं।”

इतिहास लेखन में नया दृष्टिकोण
प्रो. सकलानी के नेतृत्व में एनसीईआरटी की टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि पाठ्यपुस्तकों में केवल तथ्यों का समावेश हो, न कि किसी विशेष विचारधारा का प्रभाव। इसके तहत ऐसे अध्याय शामिल किए जा रहे हैं, जिनमें भारत की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और विविधता को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।

इतिहास के नए संस्करणों में मुगलों, ब्रिटिश शासन और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ उन क्षेत्रीय नायकों और घटनाओं को भी शामिल किया जा रहा है, जिन्हें अब तक मुख्यधारा के इतिहास में सीमित स्थान मिला था। इस बदलाव से छात्रों को न केवल व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा, बल्कि वे अपनी जड़ों से भी गहराई से जुड़ सकेंगे।

भविष्य की दिशा
एनसीईआरटी का यह प्रयास न केवल शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाएगा, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र और सांस्कृतिक गर्व को भी सुदृढ़ करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव युवाओं में न केवल जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें एक सशक्त, आत्मनिर्भर और राष्ट्रप्रेमी नागरिक बनाने में मदद करेगा।

इस तरह प्रो. डीपी सकलानी के नेतृत्व में इतिहास लेखन का यह नया दौर भारतीय शिक्षा और समाज के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

 

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