रक्षाबंधन 2025: 9 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, दशकों बाद भद्रा रहित विशेष संयोग

इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को भद्रा रहित, बहनें दिनभर बांध सकेंगी राखी, श्रावणी उपाकर्म का भी शुभ संयोग

हरिद्वार। इस वर्ष रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म दोनों ही पर्व 9 अगस्त 2025 को पड़ रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे यह पर्व पूर्णतः शुभ मुहूर्त में मनाया जा सकेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दशकों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब राखी बांधने का कार्य बिना किसी अशुभ काल के दिनभर किया जा सकता है।

भद्रा रहित रक्षाबंधन: पूरे दिन राखी बांधने की अनुमति

शास्त्रों में भद्रा को अशुभ माना गया है और ऐसे समय में शुभ कार्यों, विशेषकर रक्षा सूत्र बांधने से मना किया गया है। पं. देवेंद्र शुक्ल शास्त्री के अनुसार, इस बार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, जिससे दिनभर रक्षाबंधन मनाने में कोई बाधा नहीं होगी। बहनें सुबह से शाम तक अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

श्रवण नक्षत्र और सौभाग्य योग का विशेष संयोग

9 अगस्त को शनिवार, श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग और त्रिवेणी योग का महासंयोग बन रहा है। इस दिन चंद्रमा मकर राशि में स्थित होंगे, जो शनि की राशि मानी जाती है।

  • श्रवण नक्षत्र के अधिपति: भगवान विष्णु

  • सौभाग्य योग के अधिपति: भगवान ब्रह्मा
    इस प्रकार यह पर्व ब्रह्मा और विष्णु की दृष्टि में सम्पन्न होगा, जो इसे अत्यंत सौभाग्यशाली और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।


श्रावणी उपाकर्म: ब्राह्मणों का विशेष पर्व

रक्षाबंधन के साथ-साथ श्रावणी उपाकर्म भी इसी दिन मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से ब्राह्मण समाज का प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दिन ब्राह्मण नदी के तट पर जाकर जनेऊ धारण (रक्षा सूत्र संधान) करते हैं और हिमाद्रि स्नान, वेद पाठ व संकल्प के साथ धर्मानुष्ठान करते हैं।

चार वर्णों के प्रमुख पर्व

  • ब्राह्मण: श्रावणी उपाकर्म

  • क्षत्रिय: दशहरा

  • वैश्य: दीपावली

  • शूद्र: होली

इस परंपरा के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व ब्राह्मणों के लिए विशेष महत्व रखता है, और इस बार इसका संयोग और भी पवित्र बन गया है।


निष्कर्ष

रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म का यह विशेष योग धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। भद्रा रहित, शुभ ग्रह स्थिति और शुभ योगों की उपस्थिति इसे एक अद्वितीय और निर्विघ्न पर्व बना रही है, जिसका उत्सव पूरे दिन आनंदपूर्वक मनाया जा सकेगा।

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