सत्यनारायण मिश्रा। वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी में फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन 22 जुलाई 2025 से जारी है और 23 जुलाई को भी गति पकड़ रहा है। सैकड़ों पीएचडी, एमटेक और बीटेक छात्र “अत्यधिक” फीस वृद्धि का विरोध कर रहे हैं, जिसमें “कम करो, फीस वृद्धि कम करो” और “फीस वृद्धि वापस लो” जैसे नारे लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, आईआईटी गुवाहाटी प्रशासन ने 23 जुलाई 2025 को एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
आईआईटी गुवाहाटी ने अपने बयान में बुधवार की देर शाम कहा कि सात वर्षों के बाद फीस में संशोधन किया गया है, जिसमें मौजूदा छात्रों के लिए प्रति सेमेस्टर 8,900 रुपये की वृद्धि की गई है। प्रशासन के अनुसार, यह वृद्धि छात्र कल्याण और गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए की गई है, जिसमें हॉस्टल-स्तरीय आयोजनों, सांस्कृतिक और खेल उत्सवों, और जिमखाना द्वारा संचालित पहलों (इंटर-आईआईटी भागीदारी से परे) के लिए बढ़े हुए आवंटन शामिल हैं।
प्रशासन ने बताया कि पिछले महीने फीस वृद्धि की घोषणा के बाद, पीजी और पीएचडी छात्रों के एक समूह ने 17 जुलाई 2025 को एक ओपन हाउस बैठक में फीस के बढ़े हुए घटकों पर स्पष्टीकरण मांगा था। इस चार घंटे की बैठक में प्रशासन ने विस्तृत जानकारी दी और जरूरतमंद छात्रों के लिए स्टूडेंट्स वेलफेयर फंड के माध्यम से ऋण की व्यवस्था की जानकारी दी। बैठक के अंत में, छात्रों से कहा गया कि यदि उनकी कोई और चिंता है, तो वे अपनी लिखित शिकायत जमा करें। प्रशासन का दावा है कि अब तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
बयान के मुताबिक, हालांकि, 22 जुलाई 2025 को, कुछ छात्रों के एक छोटे समूह ने बिना पूर्व सूचना या लिखित शिकायत के प्रशासनिक भवन के सामने विरोध शुरू कर दिया। प्रशासन के अनुसार, 8,400 छात्रों के कुल समूह में से अधिकांश छात्र इस विरोध में शामिल नहीं हैं।
प्रशासन ने यह भी कहा कि इस छोटे समूह ने निर्वाचित छात्र संगठन को दरकिनार किया है। प्रशासन का दावा है कि निर्वाचित छात्र संगठन ने बयान दिया है कि “फीस संशोधन के लिए प्रस्ताव रखने हेतु चल रही बातचीत के बावजूद, इस छोटे समूह ने छात्र प्रतिनिधियों की अनदेखी की और सुलह के प्रयासों को कमजोर किया। निर्वाचित छात्र संगठन इस विरोध का हिस्सा नहीं है और उचित माध्यमों से समाधान के लिए काम कर रहा है।”
प्रशासन ने छात्र कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और रचनात्मक व औपचारिक माध्यमों से संवाद को प्रोत्साहित करने की बात कही।
स्टूडेंट्स की शिकायतें और विरोध
स्टूडेंट्स का कहना है कि प्रशासन ने 17 जुलाई की बैठक में फीस संशोधन पर विचार करने का वादा किया था, लेकिन 22 जुलाई को पंजीकरण के दौरान कोई बदलाव नहीं हुआ। जिन छात्रों ने बढ़ी हुई फीस का भुगतान नहीं किया, उन्हें सेमेस्टर पंजीकरण से रोक दिया गया, जिसने आक्रोश को और बढ़ाया।
मुख्य शिकायतें:
HRA विवाद
– छात्रों का आरोप है कि केंद्र सरकार से प्राप्त हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का भुगतान नहीं किया जा रहा, जबकि हॉस्टल शुल्क अलग से वसूला जा रहा है।
मेस की गुणवत्ता
– मेस शुल्क में वृद्धि के बावजूद, भोजन की गुणवत्ता और पोषण मूल्य में कमी।
आर्थिक बोझ
– पीएचडी छात्रों के लिए फीस उनके मासिक स्टाइपेंड (लगभग 37,000 रुपये) से अधिक है, जिससे आर्थिक तनाव बढ़ रहा है।
फेस्ट शुल्क
– 1,300 रुपये प्रति छात्र प्रति सेमेस्टर का नया “फेस्ट शुल्क” अनुचित बताया गया, क्योंकि वार्षिक फेस्ट पहले से ही प्रायोजित होता है।
प्रशासन का बयान
मौजूदा छात्रों के लिए प्रति सेमेस्टर 8,900 रुपये की वृद्धि। हालांकि, छात्रों का दावा है कि पीएचडी छात्रों की फीस 34,800 रुपये से बढ़कर 45,700 रुपये (10,900 रुपये की वृद्धि) हो गई, और नए पीएचडी छात्रों को 92,000 रुपये का शुरुआती भुगतान करना पड़ रहा है। कुल सेमेस्टर फीस अब लगभग 57,000 रुपये है।
अन्य शुल्क
– मेस शुल्क: 12,000 रुपये से बढ़कर 22,000 रुपये।
– जिमखाना शुल्क: 1,000 रुपये से 2,000 रुपये।
– मेडिकल शुल्क: 100 रुपये से 500 रुपये।
– हॉस्टल किराया: 1,000 रुपये से 2,000 रुपये।
– हॉस्टल फंड: 600 रुपये से 2,200 रुपये।
– बिजली और पानी का शुल्क: 2,500 रुपये से 3,500 रुपये।
– फेस्ट शुल्क: 1,300 रुपये प्रति सेमेस्टर।
– **पार्ट-टाइम स्कॉलर्स**: फीस 2,500 रुपये से बढ़कर 25,000 रुपये प्रति सेमेस्टर।
– **बीटेक और एमटेक**: कुल बीटेक प्रोग्राम की फीस 9.04 लाख रुपये (4 वर्ष) और एमटेक की 1.24 लाख रुपये (2 वर्ष)। हॉस्टल शुल्क 59,500 रुपये प्रति सेमेस्टर।
संतुलित विश्लेषण
– छात्रों का पक्ष: छात्रों का कहना है कि फीस वृद्धि उनकी आर्थिक क्षमता से अधिक है, और HRA की गैर-भुगतान और मेस की गुणवत्ता जैसे मुद्दों ने उनके असंतोष को बढ़ाया है। पंजीकरण पर रोक को उन्होंने “अनुचित” बताया।
– प्रशासन का पक्ष: प्रशासन का दावा है कि फीस वृद्धि सात वर्षों के बाद जरूरी थी और इसका उपयोग छात्र कल्याण के लिए किया जाएगा। उन्होंने ऋण की व्यवस्था और संवाद की खुली नीति का हवाला दिया, लेकिन कोई लिखित शिकायत न मिलने की बात कही।
विवाद का केंद्र
प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद में कमी और विश्वास की कमी प्रमुख मुद्दा है। छात्रों का मानना है कि 17 जुलाई के आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ, जबकि प्रशासन का कहना है कि छात्रों ने औपचारिक शिकायत नहीं की।