पहाड़ से लेकर मैदान तक बारिश का दौर जारी, भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदान तक बारिश का सिलसिला जारी है, जिसके कारण कई स्थानों पर जलभराव, मार्गों की अवरुद्धता और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने मंगलवार को देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि राज्य में बारिश का सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता बढ़ने के कारण जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और इसके साथ ही नदियां भी उफान पर आ सकती हैं। इसके मद्देनजर प्रशासन को तैयार रहने और सभी संभावित परिस्थितियों का मुकाबला करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य आपदा प्राधिकरण ने जारी किए निर्देश

राज्य आपदा प्राधिकरण के सचिव विनोद सुमन ने बताया कि पर्वतीय जिलों में भारी बारिश के चलते सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही, लोगों को जलभराव, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए सावधानी बरतने की अपील की गई है।

पर्वतीय मार्गों पर अवरुद्धता जारी, लेकिन सुधार की प्रक्रिया तेज

मौसम के कारण सबसे ज्यादा असर सड़कों पर पड़ा है, जहां कई मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सोमवार शाम को जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया कि बारिश के कारण प्रदेश में कुल 202 मार्ग अवरुद्ध हो गए थे, जिनमें से 168 मार्गों को खोल लिया गया है। हालांकि, 34 मार्ग अभी भी अवरुद्ध हैं, जिनमें से 03 राज्य मार्ग, 06 मुख्य जिला मार्ग, 01 जिला मार्ग और 24 ग्रामीण मार्ग शामिल हैं।

इन मार्गों को जल्द खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। कुल 514 मशीनें विभिन्न स्थानों पर तैनात की गई हैं, जहां मार्गों के बंद होने की संभावना बनी हुई है। विभाग ने कहा कि सभी अवरुद्ध मार्गों को शीघ्र खोलने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि यातायात को सामान्य किया जा सके और लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी

बारिश के कारण राज्य में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ने की आशंका है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में इन घटनाओं का खतरा अधिक है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की है कि इन क्षेत्रों में भारी बारिश से भूस्खलन और सड़कें अवरूद्ध हो सकती हैं। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने इन क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों में खास तौर पर जलस्रोतों के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है, क्योंकि बारिश के कारण जलस्तर बढ़ सकता है और बाढ़ का खतरा हो सकता है। साथ ही, सड़कों पर यात्रा करने वाले लोगों से भी यह अपील की गई है कि वे केवल जरूरी यात्रा करें और यात्रा से पहले मौसम की स्थिति का मूल्यांकन कर लें।

समय रहते की जा रही है स्थिति पर नजर

राज्य सरकार और प्रशासन बारिश के असर को लेकर सतर्क हैं और स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है। लोक निर्माण विभाग, पुलिस और आपदा प्राधिकरण ने मिलकर त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों और मशीनों की संख्या बढ़ा दी है। आपात स्थिति में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और राहत कार्यों के लिए तैयारियां की जा रही हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से बचने के लिए सावधान रहें और प्रशासन के द्वारा जारी किए गए अलर्ट्स का पालन करें। प्रशासन ने खासकर ऊंचे इलाकों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अलर्ट रहने की सलाह दी है।

निष्कर्ष

प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर लोगों की कठिनाइयों को बढ़ा दिया है, लेकिन प्रशासन और विभिन्न विभागों द्वारा तेजी से किए जा रहे प्रयासों से स्थिति में सुधार की उम्मीद है। यदि बारिश का यह दौर जारी रहता है, तो अधिक सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना से बचा जा सके।

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