नई दिल्ली, संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को भारी हंगामे के बीच हुई। लोकसभा में विपक्ष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार – पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक – स्थगित करनी पड़ी।
दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुई कार्यवाही
लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी दलों के सदस्य ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर वेल में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
सरकार का रुख: चर्चा के लिए तैयार हैं
लोकसभा के उप नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर नियमानुसार चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा:
“सरकार चाहती है कि सदन में सभी विषयों पर चर्चा हो। विपक्ष यदि किसी विषय पर चर्चा चाहता है तो वह उचित प्रक्रिया के तहत की जा सकती है। हम चर्चा से नहीं भागते।”
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि दोपहर में होने वाली कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में चर्चा के विषय और समय पर सभी दलों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।
लोकसभा अध्यक्ष की अपील रही बेअसर
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा प्रश्नकाल चलने देने की बार-बार अपील के बावजूद विपक्ष हंगामा करता रहा। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा को तैयार है और इसके लिए समय निर्धारित किया जा सकता है, लेकिन सत्र के पहले ही दिन प्रश्नकाल बाधित करना अनुचित है।
हालांकि हंगामा थमता न देख सदन को पहले 12 बजे तक और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
पीठासीन अधिकारी ने जताई नाराजगी
जब दोपहर 12 बजे के बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो भी विपक्षी सदस्य अपनी जगह पर लौटने को तैयार नहीं थे। पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जहां सांसद जनता से जुड़े प्रश्नों को उठाते हैं। उन्होंने कहा:
“लोकतंत्र में असहमति का स्थान है, लेकिन उसके लिए भी एक मर्यादा और प्रक्रिया होती है। इस तरह के व्यवहार से सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है।”
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
विपक्ष जिन मुद्दों को लेकर हंगामा कर रहा है, उनमें सबसे प्रमुख ‘ऑपरेशन सिंदूर’ है। हालांकि इस विषय पर विस्तृत जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह एक हालिया सैन्य कार्रवाई या सुरक्षा से जुड़ी बड़ी घटना हो सकती है, जिसे लेकर विपक्ष सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
विपक्ष की मांग: तुरंत हो चर्चा
विपक्षी दलों – खासकर कांग्रेस, टीएमसी, आप और डीएमके – ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा से भाग रही है। उनका कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा विषय है, जिस पर सदन में तत्काल चर्चा आवश्यक है।
निष्कर्ष
मानसून सत्र की शुरुआत से ही टकराव की स्थिति बन गई है। जहां सरकार चर्चा के लिए तैयार रहने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष तुरंत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है। अब देखना होगा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद सदन की कार्यवाही सुचारू हो पाती है या नहीं।