हरेला पर्व पर पूर्व सैनिकों का हरित संकल्प: दो लाख पौधे रोपकर निभाएंगे पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका

उत्तराखंड का पारंपरिक हरेला पर्व अब केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनता जा रहा है। इसी क्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने रविवार को एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पूर्व सैनिकों से प्रदेशभर में दो लाख से अधिक पौधे रोपने का आह्वान किया है।

पर्यावरण सेवा में सैनिकों का योगदान
देहरादून में आयोजित पूर्व सैनिकों की एक विशेष बैठक में मंत्री जोशी ने कहा,

“पूर्व सैनिकों ने देश की रक्षा में अद्वितीय योगदान दिया है। अब वक्त है कि वे उसी समर्पण के साथ प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा में भी भूमिका निभाएं।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल हरेला पर्व को हरित क्रांति में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि यह पर्व सिर्फ वृक्षारोपण तक सीमित न रहकर एक जन आंदोलन बने।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान
बैठक में मंत्री ने 16 जुलाई को हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाले “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने पूर्व सैनिकों से कहा कि वे न केवल पौधरोपण करें बल्कि अन्य लोगों को भी इस अभियान से जोड़ें।

उन्होंने कहा:

“यह अभियान सांस्कृतिक मूल्यों, मातृ वंदना और पर्यावरण प्रेम का एक जीवंत संगम है। हर पूर्व सैनिक को कम से कम एक पौधा अपनी मां के नाम से लगाना चाहिए।”

सेवा भाव से हरियाली की ओर
मंत्री जोशी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पूर्व सैनिकों का अनुशासन, नेतृत्व और सेवा भावना समाज को प्रेरणा दे सकती है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरा विश्व पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है, ऐसे में पूर्व सैनिकों जैसे संगठित समूहों का आगे आना एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संकेत है।

बैठक में उपस्थित रहे ये प्रमुख पूर्व सैनिक
बैठक में कई वरिष्ठ पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। प्रमुख नामों में शामिल हैं:

कर्नल (से.नि.) रघुवीर सिंह भंडारी, सैनिक प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष

कर्नल (से.नि.) रविन्द्र सिंह रांगड़ा

पीबीआरओ अध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट

सूबेदार राकेश प्रसाद

हवलदार विक्रम सिंह, सोबन सिंह रावत, जसपाल, राजे सिंह रावत आदि

इन सभी ने हरेला पर्व पर सामूहिक पौधरोपण कार्यक्रमों में भाग लेने और दूसरों को भी जोड़ने का संकल्प लिया।

जन-जागरूकता का माध्यम बनेगा हरेला पर्व
मंत्री जोशी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा है कि हरेला पर्व केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम न रह जाए, बल्कि यह हर नागरिक को अपने कर्तव्य और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का बोध कराए।
उन्होंने कहा:

“उत्तराखंड की संस्कृति में प्रकृति पूजन की परंपरा है। हमें इसे नई पीढ़ी तक ले जाना है। हरेला पर्व के ज़रिए हम यह संदेश दे रहे हैं कि देशभक्ति का मतलब केवल सीमा की रक्षा नहीं, प्रकृति की रक्षा भी है।”

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