मुन्नी देवी की संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी

रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के हुप्पू पंचायत स्थित तोयर गाँव की रहने वाली मुन्नी देवी एक साधारण आदिवासी (Scheduled Tribe) महिला हैं। उनका जीवन कभी गरीबी, सामाजिक अपमान और अस्थिर आय के बीच उलझा हुआ था। लेकिन आज वे गाँव में प्रेरणा की मिसाल बन चुकी हैं- एक ऐसी महिला, जिन्होंने अपनी परिस्थितियों को हराकर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।

संघर्ष भरा प्रारंभः एक मजबूरी से भरा जीवन

मुन्नी देवी का पारिवारिक जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण था। उनके परिवार में उनके पति मंशु करमाली एवं चार बच्चे है जिसमे दो बेटे और दो बेटियां है। उनके पती का रोजगार अनियमित था और आमदनी भी बहुत कम था। ऐसे में पूरे परिवार का खर्च उठाना मुश्किल हो गया था। बच्चों की पढ़ाई, भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती से कम नहीं था। आर्थिक तंगी से परेशान होकर मुन्नी देवी ने घर की आमदनी बढ़ाने के लिए महुआ शराब/हड़िया बनाना और बेचना शुरू किया। यह काम सामाजिक रूप से निंदनीय था, लेकिन मजबूरी में उन्हें यही रास्ता अपनाना पड़ा। हालांकि यह काम उन्हें थोड़ी-बहुत आय दिलाता था, लेकिन इसके कारण समाज में उनका मान-सम्मान गिरता जा रहा था। समाज की नजरों में वे “शराब बेचने वाली” महिला के रूप में जानी जाती थीं। इस काम से स्वास्थ्य को भी खतरा था और परिवार के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।

बदलाव की शुरुआतः एक छोटे से कदम ने लाई बड़ी क्रांति

समाज में बदलते हालात और आत्मसम्मान की तलाश में मुन्नी देवी ने एक दिन यह तय किया कि अब कुछ बदलना होगा। उन्होंने स्वयं को बेहतर बनाने और अपने परिवार को एक नई दिशा देने का निश्चय किया। वहीं समय था जब उन्हें 2016 में गांव की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) के बारे में जानकारी मिली। पहले उन्होंने संकोच किया, लेकिन फिर साहस जुटाकर दिनांक 28-04-2016 को ‘सरस्वती महिला मंडल’ नामक समूह में जुडी। उसी पल से उनके जीवन में बदलाव की असली शुरुआत हुई। इसके बाद वह तोयर आजीविका महिला ग्राम संगठन से भी जुड़ गई।

समूह से मिली नई पहचान और आत्मविश्वा

समूह से जुड़ने के बाद नियमित रूप से समूह के दस बैठक में भाग लेने से मुन्नी देवी का आत्मविश्वास बढ़ा। पहले जो महिला केवल घरेलू कामों और शराब बेचने तक सीमित थी, अब वह नियमित बैठकों में भाग लेने लगीं, बचत करने लगीं, और समूह की अन्य महिलाओं से विचार-विमर्श करने लगीं। समूह के माध्यम से उन्हें सरकार की योजना ‘फुलो शानो आशीर्वाद अभियान (PJAA)’ के बारे में जानकारी प्राप्त हुआ। यह झारखंड सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को अवैध रूप से महुआ शराब/हडिया बेचने जैसे अपमानजनक कार्यों से बाहर निकाल कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और आजीविका के अवसर प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को व्याजमुक्त ऋण दिया जाता है, ताकि वे एक सम्मानजनक आजीविका से सम्बंधित कार्य प्रारंभ कर सके।

नई राह की शुरुआतः ब्याजमुक्त ऋण से पशुपालन की ओर

मुन्नी देवी ने PJAA योजना के तहत ₹20,000 का व्याजमुक्त ऋण प्राप्त किया। प्राप्त व्याजमुक्त ऋण की राशी तथा कुछ स्वयं के बचत राशि से उन्होंने दो गायें खरीदीं और पशुपालन का काम शुरू किया। महुआ शराब के व्यापार को पूरी तरह छोड़कर उन्होंने अब दूध उत्पादन में अपना भविष्य देखा।

गायों की देखभाल, चारा व्यवस्था, साफ-सफाई, दूध निकालना, और बाजार तक पहुँचाना-यह सब उनके लिए नया था। लेकिन मुन्नी देवी ने हार नहीं मानी। समूह की अन्य महिलाओं और आजीविका संगठन के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे सब कुछ सीख लिया। पशुपालन और दूध उत्पादन से उन्हें अब प्रति माह ₹8,000 से ₹10,000 की आय होने लगी है।

इस आमदनी से उन्होंने समय पर ऋण की किश्तें चुकाई और बचत भी शुरू की और सबसे बड़ी बात यह है उनका पारिवारिक जीवन में सुधार हुआ और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी, उनका एक बेटा प्राइवेट जॉब करने लगा और घर में एक तीन पहिया ऑटो भी खरीदी है जो उनके पति चलाते है. जिससे माह में ₹7,000 से ₹8,000 आय प्राप्त होता है. अब उनका लगभग ₹1,50,000 वार्षिक आय हो रहा है. उन्होंने अपनी दोनो बेटियों की शादी भी कर ली और अब घर में शांति और संतुलन आ गया। समाज में उन्हें अब सम्मान की नजरों से देखा जाने लगा। पहले जो लोग उन्हें हंसी का पात्र बनाते थे, अब वे मुन्नी देवी से प्रेरणा लेने लगे। उनके आत्म-सम्मान में वृद्धि हुई और उन्होंने गाँव की अन्य महिलाओं को भी यही राह अपनाने के लिए प्रेरित किया।

सामाजिक प्रभाव और प्रेरणा स्रोत

आज मुन्नी देवी न केवल अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि वह अपने गाँव की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। वे नियमित रूप से गाँव की महिलाओं को PJAA से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्हें यह समझाने में सफल रहीं कि अवैध और अपमानजनक कार्यों को छोड़कर भी एक सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है। समूह की बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सरकार की योजनाओं में वे सक्रिय भाग लेती हैं। अब गाँव के ग्रामीण महिलाएं भी मुन्नी देवी की तरह स्वरोजगार और पशुपालन की ओर आकर्षित हो रही हैं।

मुन्नी देवी का संदेश आत्मविश्वास से बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम हमें यह सिखाता है कि हर परिस्थिति में परिवर्तन संभव है-जरूरत है तो बस एक सही दिशा, सहयोग और आत्मविश्वास की। तो जिंदगी जरूर बदलती है। आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता सबसे बड़ा धन है।

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