उज्जैन में मोहर्रम जुलूस के दौरान तनाव: पुलिस ने बैरिकेड तोड़ने पर लाठीचार्ज, 16 पर नामजद मुकदमा
उज्जैन। शनिवार की रात उज्जैन शहर के खजूरवाली मस्जिद क्षेत्र में मोहर्रम के जुलूस के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। निर्धारित रूट और प्रशासन की अनुमति के नियमों का उल्लंघन करते हुए कुछ आयोजकों ने जुलूस को जबरन दूसरे रास्ते पर मोड़ने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ते हुए भीड़ प्रतीकात्मक घोड़े के साथ अब्दालपुरा की ओर बढ़ने लगी, जिससे अफरा-तफरी मच गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना में पुलिसकर्मी समेत कई लोग घायल हुए और 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
घटना का पूरा विवरण
मोहर्रम के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी शहर में ताजिया जुलूस निकाला गया। आयोजन समिति और प्रशासन के बीच पहले से यह सहमति बनी थी कि जुलूस एक निर्धारित मार्ग (खजूरवाली मस्जिद से तपोखाना) से ही निकलेगा। लेकिन शनिवार रात लगभग 10 बजे के आसपास जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने प्रतीकात्मक घोड़े को लेकर बैरिकेड्स की ओर बढ़ना शुरू किया और जब पुलिस ने उन्हें रोका, तो भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ दिए।
प्रतीकात्मक घोड़े से बिगड़े हालात
घटना के समय प्रतीकात्मक घोड़ा बैरिकेड से टकरा गया। उसमें सवार युवक का संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। घोड़े के गिरते ही भीड़ में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने इधर-उधर भागना शुरू कर दिया। इस भगदड़ में कुछ लोग घायल हो गए, जिनमें तीन से पाँच पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घोड़ा भी असंतुलन के कारण सड़क पर गिर गया, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति और गंभीर हो गई।
पुलिस की प्रतिक्रिया और लाठीचार्ज
स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने नियंत्रण के लिए लाठीचार्ज शुरू कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अतिरिक्त बल भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई लोगों की सुरक्षा के लिए की गई थी, क्योंकि अगर स्थिति और बिगड़ती, तो भारी जनहानि हो सकती थी।
16 लोगों पर FIR दर्ज
पुलिस ने इस मामले में आयोजक इरफान खान उर्फ “लल्ला” सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है, जिनमें शासकीय कार्य में बाधा, अवैध भीड़ एकत्र करना, और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं। जीवाजीगंज थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रशासन और स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा, “समझौते के बावजूद आयोजनकर्ताओं ने नियम तोड़े, जिससे प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।” वहीं नगर निगम और स्थानीय समाजसेवियों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों को नियमों के तहत ही चलाना चाहिए ताकि पूरे समाज की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अगले कदम और सुरक्षा उपाय
घटना के बाद रविवार को पुलिस ने पूरे क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही, CCTV फुटेज की मदद से घटना में शामिल अन्य अज्ञात लोगों की पहचान की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उपद्रव करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष
उज्जैन की यह घटना धार्मिक आयोजनों के दौरान संयम और नियमों के पालन की आवश्यकता को उजागर करती है। यदि तय रूट और प्रशासन के निर्देशों का पालन किया गया होता, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी। पुलिस की कार्रवाई ने स्थिति को काबू में किया, लेकिन इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों को लेकर और सख्त निगरानी और सामुदायिक समन्वय की ज़रूरत है।