भोपाल गैस त्रासदी का काला अध्याय समाप्त: पीथमपुर प्लांट में यूनियन कार्बाइड का 337 टन जहरीला कचरा जलाया गया
पीथमपुर (मध्य प्रदेश), 1 जुलाई 2025:
मध्य प्रदेश के धार जिले के औद्योगिक कस्बे पीथमपुर में स्थित एक डिस्पोजल प्लांट में 1984 की भयावह भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ा यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का 337 टन जहरीला कचरा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। यह जानकारी एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को दी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का सफलतापूर्वक समापन 29 और 30 जून की मध्यरात्रि को हुआ, जिससे देश के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक के जख्मों पर मरहम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
इस कचरे को पीथमपुर स्थित भारत सरकार के अधिकृत ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (TSDF) प्लांट में वैज्ञानिक विधि से जलाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया छह महीने की योजना और परीक्षण के बाद सफलतापूर्वक पूरी की गई।
तीन ट्रायल में 30 टन कचरा पहले ही जलाया गया
इससे पहले इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत तीन बार ट्रायल रन किए गए थे, जिनमें कुल 30 टन कचरे को सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए जलाया गया था। इन परीक्षणों में मिली सफलता के बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की निगरानी में मुख्य प्रक्रिया की शुरुआत 5 मई 2025 को की गई।
शेष बचे 307 टन जहरीले कचरे को चरणबद्ध ढंग से अत्याधुनिक इंसीनरेशन तकनीक की मदद से जलाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानकों का पूरी तरह पालन किया गया ताकि किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव पर्यावरण या जनस्वास्थ्य पर न पड़े।
1984 की भोपाल त्रासदी की कड़वी यादें
यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में 2-3 दिसंबर 1984 की रात को मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस के रिसाव से हजारों लोग मारे गए थे और लाखों प्रभावित हुए थे। यह दुर्घटना न केवल भारत, बल्कि विश्व के औद्योगिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक बन गई। हादसे के बाद फैक्ट्री के भीतर और आसपास बड़ी मात्रा में जहरीला कचरा छोड़ दिया गया था, जिसे दशकों तक उचित तरीके से नष्ट नहीं किया जा सका।
हालांकि समय-समय पर इस कचरे को हटाने और नष्ट करने की मांग उठती रही, लेकिन कानूनी, तकनीकी और पर्यावरणीय बाधाओं के चलते यह संभव नहीं हो पाया। यह कचरा लंबे समय से भोपाल के पुराने प्लांट परिसर में संग्रहीत था और इससे आसपास के भूजल और पर्यावरण को गंभीर खतरा बना हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन
कचरे के निस्तारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लम्बे समय से विचाराधीन थी। अंततः न्यायालय के निर्देशों और केंद्र तथा राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से इसे सुरक्षित तरीके से पीथमपुर के TSDF प्लांट में लाया गया और नष्ट किया गया।
MPPCB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को NGT और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न किया गया। उन्होंने कहा, “हमने कचरे की ट्रांसपोर्टेशन से लेकर निस्तारण तक हर चरण में सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन किया है।”
स्थानीय लोगों की चिंता और आश्वासन
कचरे के पीथमपुर लाए जाने को लेकर शुरुआत में स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध हुआ था। उन्हें आशंका थी कि यह प्रक्रिया उनके स्वास्थ्य और स्थानीय पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकती है। हालांकि, सरकार और विशेषज्ञों ने उन्हें आश्वस्त किया कि प्लांट में विश्वसनीय इंसीनरेशन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और किसी भी तरह के उत्सर्जन को नियंत्रित किया गया है।
एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “हमें शुरुआत में चिंता थी, लेकिन अब जब प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है, तो हम राहत महसूस कर रहे हैं।”
ऐतिहासिक पहल और भविष्य की राह
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह एक प्रतीकात्मक जीत मानी जा रही है। वर्षों से जो जहरीला कचरा उनके जीवन और पर्यावरण के लिए खतरा बना हुआ था, उसका अंत अब हो चुका है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह प्रक्रिया अन्य औद्योगिक दुर्घटनाओं के लिए भी एक मिसाल बनेगी कि समय रहते जिम्मेदारी और तकनीकी दक्षता के साथ कैसे निपटा जाए।
राज्य के पर्यावरण मंत्री ने बयान जारी कर कहा, “यह न केवल एक तकनीकी प्रक्रिया का समापन है, बल्कि उन लाखों लोगों के साथ न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है जिन्होंने इस त्रासदी को सहा। सरकार भविष्य में भी ऐसे कचरे के निस्तारण के लिए वैज्ञानिक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएगी।”
अब उम्मीद की जा रही है कि यूनियन कार्बाइड परिसर की सफाई के लिए व्यापक पुनर्वास और पुनर्निर्माण की योजनाओं पर और तेजी से काम होगा। इससे पीड़ितों को राहत मिलने के साथ-साथ भोपाल शहर के पर्यावरण को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।