मोहन बिष्ट: मत्स्य पालन से बदली तकदीर, स्वरोजगार का बना प्रेरणास्रोत
गोपेश्वर (चमोली)। कहते हैं कठिनाइयाँ अगर हौसले से टकराएँ, तो सफलता की राह खुद बन जाती है। चमोली जिले के देवाल विकासखंड अंतर्गत ग्राम ल्वाणी निवासी मोहन सिंह बिष्ट ने इस कहावत को अपने जीवन में सच कर दिखाया है। बाल्यावस्था में ही पिता को खो देने के बाद जब परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उनके कंधों पर आया, तब मोहन ने मेहनत से जीवन की दिशा बदली। दिल्ली और हरिद्वार जैसे शहरों में काम करने के बाद वे आत्मनिर्भर बनने की सोच के साथ अपने गांव लौटे और यहीं से शुरू हुआ उनके मत्स्य पालन का सफर।
मोहन सिंह बिष्ट ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाकर गांव में ट्राउट मछली पालन की शुरुआत की। उन्होंने तालाब निर्माण कर मछली पालन के क्षेत्र में कदम रखा। मत्स्य विभाग से उन्हें बीज, चारा, तकनीकी प्रशिक्षण और सब्सिडी के रूप में सतत सहयोग मिला। मोहन ने न केवल स्वयं प्रशिक्षण लिया, बल्कि अपने साथ गांव के अन्य युवाओं और महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा।
आज ल्वाणी गांव में मोहन सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में कई ट्राउट हैचरी यूनिट्स स्थापित हो चुकी हैं। इन यूनिट्स से उच्च गुणवत्ता की ट्राउट मछलियाँ न केवल जनपद बल्कि अन्य जिलों में भी सप्लाई की जा रही हैं। इस पहल ने गांव की आर्थिकी को मजबूती दी है और दर्जनों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार मिला है। ल्वाणी गांव अब मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है।
पर्यटन स्थलों की निकटता और गांव का मोटर मार्ग से जुड़ा होना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाता है। इससे मछली पालन को एक नया बाजार मिला है, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम प्राप्त हुआ है। मोहन सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए मत्स्य विभाग द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। साथ ही उनकी मत्स्य समिति को विभागीय योजनाओं के अंतर्गत विशेष मान्यता प्राप्त है।
मोहन सिंह बिष्ट न केवल एक सफल उद्यमी बने, बल्कि उन्होंने ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के प्रति जागरूक भी किया। वे उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनका मार्गदर्शन करते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है।
मोहन की यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि परिश्रम, संकल्प और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने मत्स्य पालन को न सिर्फ अपना व्यवसाय बनाया, बल्कि पूरे गांव को प्रगति की राह पर अग्रसर किया।