देहरादून। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास/महिला कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड के मुख्यालय में विभागीय कार्मिकों की प्रथम समीक्षा बैठक का आयोजन निदेशक श्रीमती रंजना राजगुरू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। बैठक में विभागीय योजनाओं के अनुशासित और संवेदनशील संचालन पर विशेष बल दिया गया।
निदेशक महोदया ने सभी कार्मिकों से अपेक्षा की कि वे विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में कर्तव्यनिष्ठा, समयपालन और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दें। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश निम्नलिखित हैं:
🔹 समय पालन और उपस्थिति
मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन के निर्देशों के अनुपालन में सभी कार्मिकों को समय पर कार्यालय में अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है।
🔹 पत्रावली परीक्षण में सतर्कता
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे पत्रावलियों का पूर्ण परीक्षण कर ही उन्हें उच्च अधिकारियों को प्रेषित करें।
🔹 जनसुनवाई में तत्परता
मुख्यालय पर आने वाले आमजन की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनकर त्वरित और नियमबद्ध कार्रवाई करने की अपेक्षा व्यक्त की गई।
🔹 पोषाहार की गुणवत्ता से समझौता नहीं
जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर उच्च गुणवत्ता का अनुपूरक पोषाहार वितरित किया जाए। खराब गुणवत्ता की सामग्री पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
🔹 जिलाधिकारियों व मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश
निदेशक महोदया ने निम्न विषयों पर तत्काल पत्र प्रेषण व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा के निर्देश दिए:
सभी योग्य गर्भवती, धात्री महिलाएं एवं बच्चे आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत हों, जिससे पोषण, स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं की ट्रैकिंग संभव हो सके।
आंगनबाड़ी कर्मियों की चयन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर नवचयनित कर्मियों को योगदान कराया जाए।
निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केन्द्रों का गुणवत्ता के साथ निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
ड्रॉप आउट किशोरियों का पुनः विद्यालयों में नामांकन कराया जाए।
आंगनबाड़ी केन्द्रों के उन्नयन हेतु कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत निजी संस्थाओं से सहयोग प्राप्त किया जाए।
बैठक का समापन करते हुए निदेशक महोदया ने कहा कि बच्चों और महिलाओं के कल्याण से जुड़ी योजनाएं अत्यंत संवेदनशील हैं और इनके संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता में समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।